हिमाचल प्रदेश में पौंग बांध झील अभयारण्य में प्रवासी पक्षियों के मरने का सिलसिला जारी है। मृत पक्षियों के नमूनों को जांच के लिए भोपाल के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान भेजा गया था, जिसमें बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है।
राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान भोपाल के निदेशक VP सिंह ने बताया कि 5 मृत हेडिडगूज के सैंपल जवाली कैंप से डिप्टी कंजर्वेटर वन्य प्राणी विभाग हिमाचल प्रदेश के माध्यम से 4 जनवरी को मिले थे। पांचों की मौत H5N1 वायरस से होने की पुष्टि हुई है। इस रिपोर्ट के आने के बाद प्रदेश सरकार ने अलर्ट जारी करने के साथ ही स्थिति पर काबू पाने के लिए सक्रियता बढ़ा दी है। जिला कांगड़ा के चार उपमंडलों में मछली, मुर्गे और अंडों की बिक्री को बैन कर दिया गया है।
क्या है बर्ड फ्लू
एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस से होने वाली इस बीमारी से पक्षी ही नहीं, मनुष्य भी प्रभावित हो सकते हैं। बर्ड फ्लू संक्रामक बीमारी है और H5N1 वायरस के कारण श्वसन तंत्र पर इसका असर पड़ता है। बर्ड फ्लू इंफेक्शन चिकन, टर्की, मोर और बत्तख जैसे पक्षियों में तेजी से फैलता है। पहले बर्ड फ्लू का मुख्य कारण पक्षियों को ही माना जाता है। लेकिन अब यह इंसान से इंसान को भी हो जाता है।
बर्ड फ्लू के लक्षण
सांस लेने में दिक्कत, हमेशा कफ बने रहना, सिर में दर्द, नाक बहना, गले में सूजन, मसल्स में दर्द, उल्टी जैसा महसूस होना, पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना आदि।
इंसानों में कैसे फैलता है
इंसान में यह बीमारी मुर्गियों या संक्रमित पक्षी के बेहद निकट रहने से फैलती है। इंसानों में बर्ड फ्लू का वायरस आंख, नाक और मुंह के जरिए प्रवेश करता है। इस वजह से इसका बचाव यही है कि संक्रमित पक्षियों खासकर मरे हुए पक्षियों से दूर रहें। संक्रमण वाले एरिया में ना जाएं। मांस और अंडे खाने से बचें।
इसी वायरस से हुई थी सैंकड़ों पक्षियों की मौत
यूरोप के 10 देशों में पिछले साल नवंबर में भी इसी वायरस के कारण सैकड़ों पक्षियों की मौत हुई थी। इससे जुड़ा एक अहम पहलू यह भी है कि नवंबर महीने में ही यूरोप की नदियां ठंड के कारण जम जाती हैं। जिस कारण परिंदे भारत और आसपास के देशों के वेटलैंड में कुछ महीने के प्रवास पर आते हैं। भारत में दिसंबर महीने से शुरू हुआ पक्षियों की मौत का सिलिसला अभी तक जारी है। केरल, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान और हिमाचल में बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत हो चुकी है।
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