साबिर के घर वाले बोले-आतंकियों से ताल्लुक होता तो खाने के लाले नहीं पड़ते; रामपाल के परिजनों ने भी बताया बेकसूर

लुधियाना के हलवारा एयरबेस की जासूसी के आरोप में गिरफ्तार तीन में से दो के आरोपी सामने आए हैं। उन्होंने अपने-अपने परिवार के सदस्य को बेकसूर बताया है। यहां तक कि हिमाचल प्रदेश के साबिर अली के परिजनों की मानें तो घर में खाने के लाले पड़े हुए हैं। अगर पुलिस वाली आतंकियों से संबंध की बात में दम होता तो घर में खाने के लाले नहीं पड़े होते, बल्कि अपार धन-संपत्ति होती। परिवार का गुजर मजदूरी से चल रहा है और पिछले 2 महीने से तो उसका पिता चोट लगने की वजह से घर पर बैठा है।

इस मामले में गिरफ्तार किए गए थे तीन लोग
बता दें कि बीते दिनों लुधियाना पुलिस ने विदेशी ताकतों के साथ मिले तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से एक की आरोपी की पहचान लुधियाना के गांव टूसा निवासी रामपाल सिंह के रूप में हुई है। दूसरा उसी के गांव का सुखकिरण सिंह उर्फ सुक्खा और तीसरा हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गांव लाल पीपल निवासी साबिर अली है। इस बारे में पुलिस का कहना है कि रामपाल के संबंध में कुछ बरस कुवैत में रहकर आने की सूचना मिली थी। यह भी जानकारी मिली थी कि वह सुक्खा और साबिर अली समेत कट्टरपंथी संगठनों के साथ मिला हुआ है। गैरकानूनी गतिविधियां चलाकर पंजाब में माहौल खराब करने के लिए पाकिस्तान में बैठे ISI एजेंट अदनाल के साथ संपर्क में है। वह उन्हें एयरबेस की अंदरूनी खुफिया जानकारी और फोटो भेजता है। ये तीनों को रिमांड पर चल रहे हैं। सोमवार को रिमांड खत्म होने के बाद पुलिस ने इन्हें कोर्ट में पेश किया तो फिर से तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया गया है।

सिरमौर के निवासी साबिर अली की मां खुशमीदा और पिता शमशाद मीडिया से बात करते हुए।

साबिर अली के परिवार की दलील
सुनवाई के वक्त जगराओं पहुंचे साबिर अली की मां खुशमीदा और पिता शमशाद ने कहा कि उनका परिवार दो जून की रोटी का भी मोहताज है। अगर साबिर के संबंध पुलिस के कहे मुताबिक आतंकियों से होते तो घर में पैसे की कोई कमी नहीं होती। शमशाद 2 महीने पहले चोट लगने के कारण खाली है और साबिर गांव में मजदूरी करता है। इसी से घर चलता है। वह सिर्फ 8वीं पास ही है, ऐसी चीजों की उसे क्या जानकारी होगी। पंजाब पुलिस 27 दिसंबर को उस वक्त उठा ले आई, जब वह मजदूरी की छुट्टी के टाइम खाना खाने के लिए आया हुआ था। पूरे गांव ने पुलिस को बताया था कि यह परिवार ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे पहले साबिर अली न तो कभी पंजाब आया और न ही ये लोग कभी उसे मिलने के लिए गांव में आए। हमने तो इन लोगों को कभी देखा भी नहीं। घर की तलाशी में भी कुछ नहीं मिला।

लुधियाना के टूसा गांव के निवासी रामपाल की पत्नी हरजीत कौर, मामा बलवीर सिंह।

क्या बोले डीजल मैकेनिक रामपाल के घरवाले
उधर, रामपाल की पत्नी हरजीत कौर, मामा बलवीर सिंह निवासी हांव भैणी दरेड़ा और मामा के लड़का मेहर सिंह निवासी बोपाराय कलां भी कोर्ट पहुंचे हुए थे। उन्होंने कहा कि रामपाल 5 वर्ष पहले कुवैत से वापस आया था। अब मेहनत-मजदूरी करके अपना परिवार पाल रहा है। डीजल मैकेनिक काम जानने के चलते कभी-कभी हलवारा एयरबेस में काम करने जाता था। लॉकडाउन के चलते काम बंद हो गया और पिछले 8 महीने से वह एयरबेस में नहीं गया है। इससे पहले भी बुलाने पर कोई काम करने जाता था तो वहां फोन अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होने के चलते वह उसे घर पर ही छोड़कर जाता था। ऐसे में उसने कहां से हलवारा एयरबेस के नक्शे तैयार कर दिए। रामपाल को केवल उसके साथ काम करने वाले दोस्तों का फोन कभी-कभी आता था। इसके अलावा उसके इसी तरह के संबंध आतंकियों से नहीं हैं। इतना ही नहीं, गांव के दूसरी तरफ रहते सुक्खा के परिवार के साथ भी कभी आना-जाना नहीं है। हिमाचल के साबिर अली को कभी उन्होंने नहीं देखा। न तो वह उससे मिलने नहीं आया और न ही रामपाल कभी हिमाचल गया है।

पांच दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली, इसीलिए बढ़वाया रिमांड
उधर, इस घटना को लेकर बड़ी बात यह भी है कि पिछले पांच दिन से तीनों के रिमांड पर चल रहने होने के बावजूद अभी तक पुलिस के हाथ कोई पुख्ता जानकारी नहीं लगी है। इसी के चलते तीनों को दोबारा रिमांड पर लिया गया है। कोर्ट में पेशी के दौरान रामपाल के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि पुलिस इन लोगों से सभी तरह की पूछताछ कर चुकी है और कुछ बाकी नहीं रहा। ऐसे में अब इनका रिमांड और नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। इसके अलावा वकील ने कहा कि जब 30 दिसंबर को इनका रिमांड हासिल किया था तो इन्हें अमृतसर स्थित इंटेरोगेशन सेंटर भेजे जाने की बात कही गई थी। वहां भेजने के गहराई से पूछताछ हो चुकी है।

उधर अदालत ने पुलिस अधिकारी से और रिमांड मांगने का कारण पूछा तो अधिकारी सिर्फ यह ही कह सका कि सुक्खा से पहले .315 बोर का पिस्तौल ही बरामद किया था। इसके इन लोगों से देश की सुरक्षा के संबंध में और गहराई से पूछताछ की जानी है, इसलिए इनकी पुलिस हिरासत में पूछताछ जरूरी है। पहले फैसला सुरक्षित रखते हुए कोर्ट ने दोपहर बाद तीनों को फिर से 3 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।



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राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के संदिग्धों को कोर्ट में पेश करने के लिए लेकर पहुंची जगराओं की पुलिस टीम।


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