डोनाल्ड ट्रंप ने दलाई लामा के उत्तराधिकारी चुनने के लिए चीन का हस्तक्षेप रोकने को तिब्बत नीति पर किए हस्ताक्षर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन में चीन का हस्तक्षेप रोकने संबंधी तिब्बत नीति पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। साथ ही उन्होंने ऐसे विधेयक पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें तिब्बत में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास स्थापित करने की बात कही गई है। यह एक ऐसा कदम है, जिसने तिब्बत पर अमेरिकी नीति को मजबूत किया और जो दलाई लामा व केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के लिए अमेरिकी सरकार के समर्थन की पुष्टि करता है।

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के अध्यक्ष डॉ. लोबसांग सांगे ने कहा कि यह कानून तिब्बतियों को आशा और न्याय का एक शक्तिशाली संदेश भेजता है और तिब्बती लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकारों, पर्यावरणीय अधिकारों और निर्वासन के संरक्षण के लिए अमेरिका का समर्थन करता है। तिब्बती लोकतंत्र पहले जैसा कभी नहीं रहा। CTA और 6 लाख तिब्बतियों की ओर से मैं इस ऐतिहासिक बिल पर हस्ताक्षर करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।

मैं बिल को पारित करने के लिए एक बार फिर अमेरिकी कांग्रेस को धन्यवाद देना चाहूंगा, विशेषकर सदन अध्यक्ष नैंसी पेलोसी को, जिन्होंने इस ऐतिहासिक विधेयक को साकार करने में अपना समर्थन दिया। मैं बिल के प्रायोजकों मार्को रुबियो और बेन कार्डिन को भी धन्यवाद देता हूं और जिम मैकगवर्न व क्रिस स्मिथ हाउस को विधेयक सीनेट में पेश करने के लिए। उन सभी को धन्यवाद जिन्होंने इसे वास्तविकता देने में योगदान दिया। ‘तिब्बती नीति एवं समर्थन कानून 2020’ में तिब्बत संबंधी विभिन्न कार्यक्रमों एवं प्रावधानों में संशोधन किया गया है।

चीन के विरोध के बावजूद अमेरिकी सीनेट ने पिछले सप्ताह इसे सर्वसम्मति से पारित किया था, जिसमें तिब्बतियों को उनके आध्यात्मिक नेता का उत्तराधिकारी चुनने के अधिकार को रेखांकित किया गया है। साथ ही तिब्बत के मुद्दों पर एक विशेष राजनयिक की भूमिका का विस्तार किया गया है। विधेयक के तहत तिब्बत संबंधी मामलों पर अमेरिका के विशेष राजनयिक को यह अधिकार दिया गया है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन कर सकता है कि अगले दलाई लामा का चयन सिर्फ तिब्बती बौद्ध समुदाय करे।

इसमें तिब्बत में तिब्बती समुदाय के समर्थन में गैर-सरकारी संगठनों को सहायता देने का प्रस्ताव है। इसमें अमेरिका में नए चीनी वाणिज्य दूतावासों पर तब तक पाबंदी की बात है, जब तक तिब्बत के ल्हासा में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की स्थापना नहीं की जाती।



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विधेयक के तहत अमेरिका के विशेष राजनयिक को यह अधिकार दिया गया है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन कर सकता है कि अगले दलाई लामा का चयन सिर्फ तिब्बती बौद्ध समुदाय करे।


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