कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से हिमाचल के इतिहास में पहली बार शीतकालीन सत्र को रद्द किया गया है। धर्मशाला के तपाेवन में स्थिति विधानसभा परिसर में 7 से 11 दिसंबर तक सत्र का आयाेजन किया जाना था।
मंगलवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस सत्र को रद्द करने का फैसला लिया गया। कैबिनेट ने सभी मंत्रियों, सांसदों, विधायकों पर सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन पर भी रोक लगा दी है। इसके अलावा राज्य में किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम के आयोजन के लिए संबंधित एसडीएम की इजाजत लेनी होगी।
यही नहीं, विवाह, जन्मदिन के अलावा अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम में तय की गई 50 की संख्या से अधिक लोग हुए तो आयोजकों पर पांच हजार रुपए जुर्माना लगेगा। गौरतलब है कि पिछले एक महीने में राज्य में एक्टिव मरीजों के बढ़ने की दर देश में सबसे ज्यादा हो गई थी। वहीं रोजाना 700-800 नए संक्रमित भी मिल रहे हैं।
हर साल विधानसभा की हाेती हैं 35 बैठकें
प्रदेश में हर साल विधानसभा की 35 बैठकें हाेती है। अभी तक 25 बैठकें हुई है। सत्र न हाेने की वजह से पांच बैठकें टल गई है। विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार का कहना है कि काेविड -19 काे लेकर अगर हालात सुधरते हैं ताे सत्र काे लेकर सरकार फिर से निर्णय ले सकती है।
शीतकालीन सत्र काे लेकर आ चुके हैं 450 प्रश्न
विधानसभा के शीतकालीन सत्र की अधिसूचना जारी हाेने के बाद विधानसभा सचिवालय के पास विधायकाें के 450 प्रश्न आ चुके हैं। इसके अलावा कई अन्य नियमाें में चर्चा के प्रस्ताव भी आ चुके है। इसमें काेराेना महामारी से निपटने संबंधी चर्चा के प्रस्ताव भी शामिल है।
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