केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के प्रतिनिधियों को चुनने के लिए दुनिया के विभिन्न देशों में रहने वाले करीब 80,000 निर्वासित तिब्बतियों ने पंजीकरण कराया है। CTA को निर्वासित तिब्बती सरकार के तौर पर भी जाना जाता है। अगले सिक्योंग (निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री) और 17वीं निर्वासित संसद के सदस्यों के चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान 3 जनवरी 2021 को होगा, जबकि अंतिम चुनाव 11 अप्रैल 2021 को होगा।
CTA के चुनाव आयोग ने कहा कि आगामी चुनाव के लिए कुल 79,697 निर्वासित तिब्बतियों ने पंजीकरण कराया है। इनमें से 55,683 मतदाता भारत में रह रहे हैं, जबकि 24,014 देश से बाहर रह रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त वांगडू सेरिंग ने कहा कि कई प्रांतीय आयोगों से प्राप्त अनुरोध के अनुसार, पंजीकरण के लिए 23 से 28 दिसंबर 2020 तक अतिरिक्त 5 दिनों का समय दिया गया है।
कई लोग दूर-दराज के क्षेत्रों में रहते हैं और उनकी समस्या को ध्यान में रखते हुए ही पंजीकरण के लिए अतिरिक्त समय प्रदान किया गया है। वहीं, दूसरी तरफ, उम्मीदवारों ने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है और मैक्लोडगंज सहित आस-पास के क्षेत्रों में सार्वजनिक दीवारों पर इनके पोस्टर देखे जा सकते हैं। लेकिन कोरोना महामारी फैलने के कारण उम्मीदवार प्रचार के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं।
चुनाव से पहले अमेरिका और चीन खेल रहे हैं खुफिया खेल
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के चुनाव से पहले अमेरिका व चीन एक-दूसरे को आउट करने के लिए खुफ़िया खेल खेलने में जुटे हुए हैं। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के चुनाव अगले साल के शुरूआत में होने हैं। इससे पहले अमेरिका व चीन, तिब्बती राजनीति में अपना प्रभुत्व हासिल करने के लिए अपने-अपने हिसाब से निर्वासित तिब्बतियों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। इन दोनों का ये खेल भारतीय प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
इस खेल के माध्यम से अमेरिका और चीन-आधारित संगठन तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के कद को कम करने के लिए साजिश रच रहे हैं। अमेरिका स्थित ट्रस्टों ने SARD को कई करोड़ रूपए दिए हैं, जो अंततः ऋण के रूप में हैं और यहां तक कि कोविड-19 से लड़ने के लिए राहत के रूप में वितरित किया गया था। इसके अलावा, अमेरिकी ईसाई मिशनरियों ने भी स्पष्ट रूप से SARD को भी इस बात के लिए वित्त पोषित किया है। इसी तरह चीन भी CTA चुनाव को प्रभावित करने की दिशा में अपने एजेंडे के तहत काम कर रहा है।
इसके लिए कहा जा रहा है कि चीन ने अमेरिका से अलग एक तरकीब अपनाई और चीनी नागरिक लुओ सांग उर्फ चार्ली पेंग को धन उगाही के लिए इस्तेमाल किया। 1,000 करोड़ रूपए से अधिक के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार लुओ सांग ने हवाला के माध्यम से इस राशि को निर्वासित तिब्बतियों को हस्तांतरित किया था। अमेरिका और चीनी दोनों खुफ़िया एजेंसियां CTA चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश अपने-अपने तरीके से कर रही हैं। इस तथ्य के बावजूद कि भारत ने तिब्बती शरणार्थियों की देखभाल में सबसे अधिक योगदान दिया है।
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