एशिया के इकलौते ओपन एयर स्केटिंग रिंक ने अपने सफर के 100 साल पूरे कर लिए हैं। इस साल दिसंबर में सेशन के शुरू हाेते ही बड़े जश्न की तैयारी थी, लेकिन काेराेना संक्रमण के मामले बढ़ने के कारण अब किसी तरह का काेई समाराेह नहीं हाेगा। आइस स्केटिंग क्लब वर्ष 1920 में शुरू हुअा। वीरवार काे आइस स्केटिंग रिंक में स्केटिंग शुरू हुई। सुबह के सेशन में लगभग 25 लाेगाेंे ने स्केटिंग की। अभी शाम का सेशन शुरू नहीं किया गया है। कोविड गाइडलाइन के चलते इस बार दस साल से उम्र के बच्चे और 60 साल से ज्यादा वाले बुजुर्गों के स्केटिंग नहीं करने दी जाएगी।
स्केटिंग के लिए रजिस्ट्रेशन स्केटिंग क्लब द्वारा मेंबरशिप करवाई गई है। इसके लिए वयस्कों से पूरे सेशन के 2800 रुपए, कपल से 3300 रुपए, वयस्क से आधे सेशन के लिए 2000 रुपए का शुल्क रखा है। वहीं, 16 वर्ष तक के बच्चों के लिए पूरे सेशन में 1600 रुपए का शुल्क और आधे सेशन के लिए 1000 रुपए शुल्क रखा है।
आइस स्केटिंग क्लब की शुरुआत 1920 में शुरू की गई। जहां आज स्केटिंग रिंक है, वहां कभी टेनिस कोर्ट हुआ करता था। ब्लेसिंगटन नाम के अंग्रेज को स्केटिंग शुरू करने का श्रेय जाता है। ब्लेसिंगटन ने देखा कि सर्दियों में टेनिस कोर्ट के नलों में पानी और इसके आसपास का पानी जम जाता है। इसको देखते हुए ब्लेसिंगटन ने टेनिस कोर्ट को पानी से भर दिया जो पूरी तरह से जम गया। इसके बाद टेनिस कोर्ट को स्केटिंग रिंक में बदल दिया। शिमला आइस स्केटिंग क्लब देश का पहला ओपन एयर स्केटिंग क्लब है, जहां प्राकृतिक तौर पर बर्फ जमाई जाती है
इस बार लगेगा रेड बैलून
शिमला में स्केटिंग होने का संकेत देने के लिए टाउनहॉल में एक लाल रंग का गुब्बारा लगाया जाता था। इससे लोगों को पता चल जाता था कि स्केटिंग शुरू हो गई है। काफी समय से गुब्बारा नहीं लगा है इस बार इसे लगाया जाएगा।
- वीरवार सुबह 25 लाेगाें ने स्केटिंग की। स्केटिंग रिंक के 100 साल पूरे हाे गए हैं। हम बड़ा जश्न करना चाह रहे थे, लेकिन काेविड के कारण परिस्थितियां बदल गई है। स्केटिंग भी साेशल डिस्टेंसिंग के तहत करवाई जा रही है। 50-50 ग्रुप में स्केटिंग करवाई जाएगी।
पंकज प्रभाकर, काेषाध्यक्ष, आइस स्केटिंग क्लब
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