सोलन शहर के सपरून चौक के नजदीक नेशनल हाईवे के किनारे बैठे रेहड़ी-फड़ी वाले यहां से उठने को तैयार नहीं है। यहां पर फोरलेन निर्माण के लिए खुदाई का काम होना है, लेकिन रेहड़ी-फड़ी वाले इस स्थान को छोड़ने का तैयार नहीं है जिससे खुदाई का काम नहीं हो पा रहा है। इन्हें हटाने के लिए वीरवार को दोपहर बाद नगर परिषद की टीम पुलिस को लेकर रेहड़ी-फड़ी वालों को हटाने के लिए पहुंची, लेकिन मजदूर संगठनों के नेताओं के विरोध के कारण टीम को बेरंग लौटना पड़ा।
नगर परिषद की टीम पूरे दल बल और पुलिस की क्यूआरटी टीम के साथ मौके पर पहुंची थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं कर सकी। नगर परिषद की ओर से कार्यकारी अधिकारी ललित कुमार की अगुवाई में टीम दोपहर बाद करीब अढ़ाई बजे सपरून चौक पहुंची थी। नगर परिषद की टीम ने पहले सभी रेहड़ी-फड़ी वालों को एक स्थान पर बुलाया और कहा कि वे यहां से कहीं और चले जाए। उनका कहना था कि उन्हें जिला प्रशासन के आदेश है और ये जगह पूरी तरह से खाली करनी है क्योंकि फोरलेन कार्य में इनकी वजह से रूकावट हो रही है।
नप का यह भी कहना था कि जिस स्थान पर रेहड़ी फड़ी धारक बैठे हैं वहां पर फोरलेन निर्माता कंपनी ने खुदाई करनी है। ऐसे में वे लोग जल्द से जल्द उस स्थान को खाली कर दें। इस पर रेहड़ी-फड़ी धारक अड़े रहे। इन लोगों का कहना था कि उनके लिए पहले रेहड़ी फड़ी लगाने के लिए उचित स्थान की व्यवस्था की जाए। जब तक प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की जाती वे लोग यहां से नहीं जाएंगे।
इसी बीच रेहड़ी फड़ी धारकों की यूनियन के प्रधान के अलावा युवा इंटक के प्रदेश अध्यक्ष राहुल तनवर और सीटू के जिला सचिव प्यारे लाल वर्मा भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद वे भी रेहड़ी फड़ी धारकों के हक में उतर गए। इस दौरान नगर परिषद की टीम व रेहड़ी फड़ी धारकों के बीच काफी समय तक गहमागहमी हुई।
अंतत: निर्णय हुआ कि इस विषय पर डीसी सोलन से बात की जाए। पूरी तैयारी के साथ पहुंची नगर परिषद की टीम रेहड़ी फड़ी धारकों के सामान को हाथ तक नहीं लगा सकी। इसके बाद यूनियन के नेता डीसी सोलन केसी चमन से मिले और उन्हें रेहड़ी-फड़ी वालों को कहीं और जगह देने की मांग की।
कहीं दूसरी जगह बैठे
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी ललित कुमार का कहना था कि उन्हें जिला प्रशासन के ऑर्डर है। इस स्थान को खाली करवाना है। जब ये स्थान पूरी तरह से खाली होगा तब यहां पर फोरलेन का कार्य शुरू होगा। उन्होंने कहा कि वे उनकी रोजी-रोटी छीनने के हक में नहीं है। वे कहीं और बैठ कर अपनी आजीविका कमा सकते हैं।
रेहड़ी-फड़ी वालों के पास नहीं लाइसेंस
सपरून चौक पर 100 से ज्यादा रेहड़ी-फड़ी वाले बैठते हैं, लेकिन इन में से अधिकतर के पास यहां बैठने का लाइसेंस नहीं है। बड़ी बात यह भी कि जिसके पास लाइसेंस भी है उन्होंने रेहड़ी आगे सबलेट की है। परवाण्ू-सोलन फोरलेन के लिए सपरून चौक के पास ओवर पास बनना है। इसका काम शुरू हो गया है।
अब पहाड़ी की कटिंग का काम पूरा हो गया है और पुरानी सड़क की खुदाई का काम होना है। इसके लिए पूरी सड़क खाली चाहिए। जबकि अभी भी वहां सड़क के किनारे रेहड़ी-फड़ी वाले बैठे हुए हैं। यहां पर रेहड़ी चलाने वालों का कहना है कि वे यहां कई साल से बैठते हैं और यही उनकी रोजी-रोटी का साधन है। अब वे कहां जाएं प्रशासन काे इसका समाधान निकालना चािहए।
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