बागबानाें ने अब सी ग्रेड सेब के भी अच्छे दाम देने की मांग उठाई है। सरकार के उपक्रम एचपीएमसी भी बागबानाें से सी ग्रेड का सेब काफी कम दाम में खरीद रहा है। इससे बागबानाें काे नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस बार छोटे आकार का सेब अधिक हैं। अधिकांश बगीचों में लार्ज, मीडियम, स्माॅल ग्रेड का सेब न के बराबर है।
ऐसे में बागबानाें को कम कीमत में बिक रहे छोटे आकार के सेब की पैकिंग और ट्रांसपोर्टेशन पर तो पूरा खर्च करना पड़ रहा, लेकिन मंडी में इसके दाम नहीं मिल पा रहे हैं। छोटे आकार के सेब में प्रति पेटी करीब 340 सेब होते हैं। इनका वजन करीब 30 किलो तक होता है। 30 किलो की इस पेटी के दाम बागबानों के अच्छी ग्रेड दाम के आधार पर तय होती है।
जबकि छाेटे आकार के सेब आधे से भी कम दाम में बिकते हैं। बागबानों ने सेब के दामों में आई गिरावट और प्राकृतिक आपदा के कारण सेब की गुणवत्ता पर हर साल पड़ने वाले व्यापक असर को देखते हुए सेब का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की है।
एचपीएमसी आठ रुपए प्रति किलाे के हिसाब से खरीदता है सेब
एचपीएमसी बागबानाें से आठ रुपए प्रति किलो की दर से सेब खरीद रहा है। जबकि हैंडलिंग शुल्क 2.75 रुपए प्रति किलोग्राम हाेता है। सरकार ने बागबानों से करीब 1.48 लाख मीट्रिक टन सेब की खरीद का लक्ष्य रखा है। फल उत्पादकों की मांग के अनुसार प्रदेश में लगभग 279 खरीद केंद्र खोले गए हैं।
ऐसे में इसमें बागबानाें काे कुछ खास फायदा नहीं हाे रहा है। सरकार ने मंडी मध्यस्थता योजना में एचपीएमसी और हिमफेड को सेब खरीदने के लिए नोडल एजेंसी बनाया है। इन दोनों एजेंसियों को बागबानों से सेब खरीदने के लिए सरकार बजट जारी करती है। बागबानों से सेब खरीदने के लिए एचपीएमसी लगभग 162 और 117 केंद्रों को हिमफेड संचालित कर रहा है। प्रदेश सरकार बागबानों की सेब फसल के न्यूनतम रेट तय कर मंडी मध्यस्थता योजना को शुरू करती है।
बागबानों को नुकसान
सेब के दामों में आई गिरवाट के चलते बागबानों को अबकी दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। मौसम की बेरुखी के चलते अबकी बार जहां सेब का आकार नहीं बढ़ पाया, वहीं मंडी में छोटे आकार का सेब कौड़ियों के भाव बिक रहा है। इससे बागबानों को अच्छा खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, एचपीएमसी भी दाम नहीं बढ़ा रहा है।
बागबानों को नहीं किया लाखाें का भुगतान
हिमाचल प्रदेश विपणन निगम (एचपीएमसी) बागबानों से सेब खरीदने के लिए खरीद केंद्र ताे खाेलता है, लेकिन उसने बागबानों का लाखों रुपए का सेब का पैसा अभी तक नहीं दिया है। बागबानों के अनुसार ऐसे में वह सरकार को सेब कैसे बेचें। वर्ष 2018-19 के दौरान एचपीएमसी ने साढ़े सोलह हजार मीट्रिक टन सेब की खरीद की, लेकिन अभी तक भी पैसा नहीं दिया है। बागवान इंतजार में हैं कि उन्हें उनकी मेहनत की कीमत कब मिलेगी। इस बार भी सेब की खरीद हाे रही है, लेकिन पैसें मिलेंगे या नहीं इस पर संशय बना हुआ है।
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