(साेमदत्त शर्मा) आईजीएमसी में इलाज के लिए आने वाले कैंसर राेगियाें काे अब पेट स्कैन सि
सीटी करवाने के लिए पीजीआई चंडीगढ़ जाने की जरूरत नहीं रहेगी। आईजीएमसी प्रशासन जल्द ही इस मशीन की खरीद करेगा। स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. राजीव सैजल के आदेशाें के बाद आईजीएमसी प्रशासन ने मशीन की खरीद के लिए प्रपाेजल तैयार कर लिया है। अब इसे सरकार काे भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही मशीन काे खरीदने का प्राेसेस शुरू कर दिया जाएगा।
माैजूदा समय में प्रदेश में पेट स्कैन मशीन नहीं है। यहां से मरीज इस टेस्ट काे करवाने के लिए पीजीआई चंडीगढ़ या निजी लैब में जाते हैं, जिसमें उन्हें 10 हजार रुपए तक चुकाने पड़ते हैं। हालांकि मार्च के बजट सत्र में प्रदेश सरकार ने इसे खरीदने की घाेषणा की थी। मगर काेराेना के कारण यह प्राेसेस डंप हाे गया था।
मगर अब दाेबारा से इसके लिए प्रपाेजल मांगा गया है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही यह मशीन आईजीएमसी में लगा दी जाएगी। बीते 26 अगस्त काे स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. राजीव सैजल ने आईजीएमसी में दाैरा किया था। इस दाैरान उन्हाेंने प्रशासन के साथ बैठक कर पेट स्कैन मशीन आईजीएमसी में लगाने के लिए खुद प्रपाेजल मांगा था।
उन्हाेंने कहा था कि सरकार जल्द से जल्द इस मशीन की खरीद करेगी ताकि राेगियाें काे पीजीआई चंडीगढ़ टेस्ट करवाने के लिए ना जाना पड़े। हालांकि यह मशीन कैंसर अस्पताल के बनने वाले नए ब्लाॅक में लगाई जाएगी। इस ब्लाॅक के निर्माण का काम भी शुरू किया गया है।
इसलिए पेट स्कैन जरूरीः जब कैंसर का पता लगाने के लिए एमआरआई में मरीज में आर्गन की शेप या ब्लड वैसल्स की सही स्थिति न पता चले तो पेट सीटी स्कैन टेस्ट की जरूरत पड़ती है। पेट स्कैन होने के बाद मरीज के मेटाबोलिज्म में हो रहे बदलाव का पता चलता है।
पेट स्कैन ये भी बता देता है कि हमारे आर्गन के साथ टिश्यू किस तरह काम कर रहे हैं। पेट स्कैन मरीज के शरीर में ब्लड फ्लो, ऑक्सीजन इनटेक का सही पता भी चलता है। जिससे डाॅक्टर उस ऑर्गन में इलाज कर सकते हैं, जिसमें कैंसर पनप रहा हाे। इससे यह भी पता चल जाता है कि कैंसर कितना फैल चुका है।
प्राइवेट लैब में 40 से 45 हजार खर्चः माैजूदा समय में प्रदेश के मरीजाें काे इस टेस्ट काे करवाने के लिए पीजीआई चंडीगढ़ और फाेर्टिस माेहाली जाना पड़ता है। यहां से हर सप्ताह 8 से 10 मरीजाें काे पीजीआई के लिए रेफर किया जाता है, जिन्हें यह टेस्ट करवाना हाेता है। पीजीआई का न्यूक्लियर मेडिसन डिपार्टमेंट और फोर्टिस मोहाली या सेक्टर 44 की एक प्राइवेट लैब में ये टेस्ट हाे रहे हैं।
प्राइवेट लैब में 40 से 45 हजार का ये टेस्ट हाेता है। हालांकि पीजीआई ये टेस्ट करीब 18 हजार में कर रहा है लेकिन पीजीआई के पास भी एक ही पेट स्कैन होने से मरीजों को लंबी वेटिंग देनी पड़ती है। जिसमें मरीजाें काे चार से छह माह का इंतजार करना पड़ता है। आईजीएमसी में ये मशीन लगने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
- स्वास्थ्य मंत्री के आदेशाें के बाद पेट स्कैन मशीन की खरीद के लिए प्रपाेजल तैयार किया जा रहा है। इसे जल्द ही सरकार काे भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही मशीन की खरीद के लिए प्राेसेस शुरू कर दिया जाएगा। इससे कैंसर मरीजाें काे काफी राहत मिलेगी। यहां से पेट सिटी करवाने के लिए उन्हें पीजीआई जाने की जरूरत नहीं रहेगी।
डाॅ. रजनीश पठानिया, प्रधानाचार्य आईजीएमसी शिमला
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