रेणुका बांध जन संघर्ष समिति की बैठक समिति के अध्यक्ष योगेंद्र कपिला के नेतृत्व में बैठक आयोजित की। बैठक में फैसला लिया गया कि विस्थापितों की समस्याओं को दूर किए बिना बांध का कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा। योगेंद्र कपिला ने आरोप लगाया कि उनकी मांगों को लेकर बांध प्रबंधन 2010 से ही विस्थापितों को गुमराह करता रहा है। बांध प्रबंधन के अधिकारियों ने विस्थापितों की किसी भी मांग को आज तक पूरा नहीं किया गया।
विस्थापितों ने आरोप लगाया कि बांध प्रबंधन के अधिकारी विस्थापितों की मांगों से जुड़े ज्ञापन और प्रस्तावों को उच्च अधिकारियों को नहीं भेजा जाता बल्कि उन्हें फाइलों में ही दबाकर रखा जा रहा है। ताकि विस्थापितों की समस्या का निराकरण न हो सके।
विस्थापितों ने मांग करते हुए कहा कि परियोजना के निर्माण से प्रभावित होने वाले परिवारों को मुख्य परियोजना प्रभावित कार्ड प्रदान किए जाए। जिन 259 परिवारों की सूची विधानसभा सत्र में भेजी गई है, उन परिवारों की सूची से समिति को भी अवगत करवाया जाए। ताकि विस्थापितों की श्रेणी का पता लग सके। जो किसान डूब क्षेत्र में पुश्तैनी खेती करते आ रहे हैं उन्हें पूर्ण विस्थापित का दर्जा दिया जाए।
15 दिन का दिया अलटीमेटम
डूब क्षेत्र से संबंध रखने वाले प्रत्येक परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी का प्रावधान व बेघर होने वाले परिवारों को लोनिवि के मूल्य पर आधारित मुआवजा दिया जाए। पंचायत परिवार रजिस्टर को आधार बना कर विस्थापितों की श्रेणी का आंकलन न किया जाए। विस्थापितों ने प्रस्ताव पारित कर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर इन मांगों का जवाब समिति को नहीं दिया गया तो उन्हें मजबूरन संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
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