डाॅ. वाईएस परमार मेडिकल काॅलेज में ऑर्थो से संबंधित मरीजों को उपचार के अभाव में रेफर किया जा रहा है। मेडिकल काॅलेज का विशेष विंग (ऑर्थो) ओपीडी में मरीजों को फ्रेक्चर टेबल न मिलने के कारण यहां पर उपचार नहीं मिल रहा है। ऑर्थो से संबधित डॉक्टरों ने भी कई बार मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के अलावा स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को इस बारे अवगत करवाया है, मगर अभी तक यहां पर टेबल नहीं लग पाया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मेडिकल कालेज में ऑर्थो ओपीडी में अधिकतर मरीज कूल्हे की चोट व अन्य हडि्डयों के चोट के मरीज आते हैं। जिन्हें यहां पर उपचार हीं दिया जाता है। मशीनरी न होने के चलते उन्हें यहां से रेफर कर दिया जाता है।
हडि्डयों की गंभीर चोट लगने के चलते मरीज को कई अस्पतालों से होकर जिला मुख्यालय मेडिकल कालेज रेफर किया जाता है। ऐसा नहीं है कि यहां पर हडि्डयों के मरीजों का उपचार नहीं किया जाता, मगर गंभीर हालत जैसे कूल्हे का टूटना व कई अन्य गंभीर फ्रेक्चर होना समझे यहां से रेफर करना ही उसका उपचार है। रीजनल अस्पताल से मेडिकल काॅलेज बने को पांच-छह साल हो गए हैं, मगर यहां पर अभी तक मूलभूत सुविधाएं नहीं जुटाई जा रही हैं। यहां पर आर्थो डिपार्टमेंट यानि के ओपीडी में कूल्हे व अन्य कई हडि्डयों के जोड़ टूटने के बाद इलाज संभव नहीं है। ऑर्थो ओपीडी के पास फ्रेक्चर टेबल नहीं है। इसका खामियाजा मरीज व उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है।
हर माह दर्जनों मरीज किए जाते हैं रेफर
डाॅ. वाईएस परमार मेडिकल काॅलेज के सूत्रों से मिली जानकारी फ्रेक्चर टेबल न होने के चलते हर माह एक दर्जन के करीब मरीजों को यहां से रेफर किया जाता है। बता दें कि फ्रेक्चर टेबल पर कूल्हे का टूटना व अन्य कई ऐसी हडि्डयों जो मानव शरीर का विशेष अंग होते है, उसका उपचार फ्रेक्चर टेबल पर ही किया जाता है, मगर यहां पर यह सुविधान होने के चलते मरीजों को यहां से रेफर किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के सुपरिटेडेंट निर्दोष कुमार ने बताया कि ऑर्थो टेबल को लेकर प्रोपोजल तैयार किया लिया जाएगा और जल्दी यहां ऑर्थो टेबल की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। उन्होंने माना कि ऑर्थो टेबल की सुविधा न होने से यहां परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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