सीटू ने श्रम कानूनों को बदलने के विरोध में शहर में रैली निकाली और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर ठाकुर ने कहा कि बीते रोज केंद्र की मोदी सरकार ने बिना चर्चा के ही मजदूरों से जुड़े श्रम कानूनों को बदलने के प्रस्ताव संसद में पास कर दिए। अलोकतांत्रिक और फासीवादी तौर तरीकों को अपना कर सरकार मजदूरों की आवाज को दबाना चाहती है।
सीटू कानून में संशोधनों के विरोध में आर-पार की लड़ाई लड़ेगा और आने बाले समय मे और भी बड़े संघर्षों की तैयारी करेगा। ठाकुर ने कहा कि बेरोजगारी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है महंगाई चरम पर है लेकिन राज्य और केंद्र सरकार की भाजपा सरकार को आम लोगों की पीड़ा नहीं समझ आ रही।
गांधी चौक पर आयोजित इस सभा में सीटू के नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार आम लोगों की पीड़ा नहीं समझते हैं और मनमाने तरीके से फैसले लिए जा रहे हैं। गरीब को और गरीब बनाया जा रहा है। ज़िला अध्यक्ष प्रताप राणा , सचिव जोगिंदर कुमार , उपाध्यक्ष रंजन शर्मा , सहसचिव सुरेश राठौड़ ने भी संबोधित किया। प्रदर्शन में प्रवीण कुमार,मीना,रवि,सुभाष,उत्तम चंद,विनोद ,दीप प्रताप,कमलजीत आदि मजदूरों के नेता मौजूद रहे।
इसलिए कर रहे हैं विरोध
सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर ठाकुर ने कहा कि नए कानून से लंबे संघर्षों और कुर्बानियों से हासिल किए काम के 8 घंटे के अधिकार को अब 12 घंटे में बदल दिया गया है। प्रोविडेंट फंड, ईएसआई और मजदूरों से कल्याण से जुड़े कानूनों को बदल दिया गया है। अब रोजगार के स्थाई प्रारूप को बदलकर सीमित समय के लिए काम दिया जाएगा जिससे नौजवानों का भविष्य बर्बाद होने बाला है।
उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने मजदूरों के विरोध करने के अधिकार को भी खत्म कर दिया है और यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार पर भी भारी भरकम जुर्माना लगाने और जेल भेजने तक के प्रावधान कर दिए हैं। जो मजदूरों को बंधुआ मजदूरी की तरफ धकेलने का ही काम करता है।
मोदी सरकार ले रही मजदूर विरोधी फैसले : राजेश
मंडी। सीटू के मंडी जिला महासचिव राजेश शर्मा के नेतृत्व में मंडी में सीटू कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदशन किया। उन्होंने बताया कि पूरे देश में केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है। देश में जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है लगातार मजदूर विरोधी फैसले ले रही है।
देश में आजादी से पहले की कानूनों को बदला जा रहा है और इन श्रम कानूनों को बदलकर श्रम संहिताओं में लाया जा रहा है। जिसमें देश में मजदूरों की स्थिति और ज्यादा दयनीय होती जा रही है। इस मौके पर सुरेंद्र कुमार, गोपिंद्र कुमार मनीराम इत्यादि सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
मजदूरों को नहीं नियोक्ताओं को होगा फायदा : रनौट
सीटू के जिला सचिवएनडी रनौट ने कहा कि इन बदलावों से देश के मजदूर वर्ग काकरीब 73 प्रतिशत हिस्सा श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएगा। देश के 44 श्रम कानूनों को खत्म करके केवल 4 लेबर कोड में तब्दील किया जाएगा जिससे नियोक्ताओं को फायदा होगा व मजदूरों का शोषण और ज्यादा गहरा होगा।
उन्होंने मांग की है कि 44 श्रम कानून के बदले 4 लेबर कोडों की प्रक्रिया और सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाई जाए। 50 वर्ष की आयु अथवा30 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण करने वाले नियमित सरकारी कर्मचारियों की छंटनी व जबरन रिटायरमेंट पर रोक लगाई जाए। इस मौके पर अध्यक्ष मोहित वर्मा, जोगिन्दर, माया थापा, नीना कश्यप, मीरा राणा, कमलेश, रमेश चन्द, नर्वदा, नीलम,कमला, केवल राम, सोम बहादुर सहित अन्य मौजूद रहे।
डीसी के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
नाहन में भारतीय ट्रेड यूनियन ने डीसी सिरमौर के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है। सीटू जिला महासचिव राजिंदर ने कहा कि मौजूदा सरकार पूरी तरह से मजदूर विरोधी है। इनका कहना है कि मजदूर के लिए बने कानूनो को खत्म करने की कोशिश मौजूदा सरकार द्वारा की जा रही है। सरकारी उपकरणों को सरकार द्वारा निजी हाथों में सौंपा जा रहा है।
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