नगर निगम का हाउस 28 सितंबर को होगा। अबकी बार हाउस हंगामेदार होने के आसार है। हाउस में इस बार नगर निगम द्वारा लीज पर दी गई संपत्तियों पर प्रॉपर्टी टैक्स लगाने का प्रस्ताव लाया जा रहा है जिसके खिलाफ सभी पार्षद एक साथ मुखर हो सकते हैं। नगर निगम का ओपन हाउस लंबे समय के बाद करवाया जा रहा है। इसमें कूड़े और पानी के बिलों को माफ करने पर भी फैसला होगा।
नगर निगम शहर में लीज पर दी गई संपत्तियों पर टैक्स लगाने की तैयारी में है। हाल ही में नगर निगम की वित संविदा एवं योजना समिति (एफसीपीसी) की बैठक में इस बारे में फैसला लिया गया है। अभी तक नगर निगम लीज पर दी गई दुकानों, स्टॉलों और अन्य संपत्तियों पर प्रॉपर्टी टैक्स नहीं वसूल रहा। शिमला शहर में नगर निगम की करीब 987 दुकानें लीज पर दी गई हैं। इसके अलावा स्टॉल,गोदाम व अन्य संपत्तियां भी लीज पर दी गई हैं। कुल मिलाकर नगर निगम की 1200 के करीब संपत्तियों को लीज पर दिया गया हैं।
अब नगर निगम इन पर भी प्रॉपर्टी टैक्स लगाने जा रहा है। शहर के कारोबारी नगर निगम द्वारा लीज पर दी गई दुकानों का किराया बढ़ाने का पहले ही भारी विरोध कर रहे हैं और अब इन पर प्रॉपर्टी टैक्स लगाया जा रहा है। इसका भी कारोबारी विरोध कर रहे हैं और पार्षदों पर भी इसको लेकर दबाव बढ़ गया है। हालांकि टैक्स लगने का फैसला सोमवार को होने वाले नगर निगम के हाउस में होगा। मगर इस मुद्दे पर हंगामा होने के पूरे आसार बने हुए हैं। सभी पार्षद इस मुद्दे पर एक साथ मिलकर विरोध कर सकते हैं।
नगर निगम के हाउस में कवर्ड पार्किंग में कार पार्किंग का शुल्क लेने का मामला भी गरमा सकता है। एफसीपीसी की बैठक में फैसला लिया गया है कि वार्डों में कवर्ड पार्किंग के लिए एक हजार रुपए प्रति कार शुल्क एमसी वसूलेगा, जबकि दो पहिया वाहन का 400 रुपए वसूल करेगा। शिमला के विभिन्न वार्डों में करीब 345 गाड़ियों की कवर्ड पार्किंग खाली पड़ी हुई हैं। पार्षद शहर में येलो लाइन पार्किंग का शुल्क घटाने और इसको किश्तों में लेने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा भी नगर निगम के हाउस में प्रमुखता से उठ सकता है।
पानी व कूड़े के बिलों को माफ करने पर होगा फैसला
नगर निगम के हाउस में कूड़े व पानी के बिलों में राहत देने का मामला भी जाएगा। शिमला में कोरोना काल में बंद पड़े होटलों, दुकानों से कूड़े व पानी के बिल वसूले गए हैं, जबकि इस दौरान दुकानें, होटल व अन्य संस्थान बंद रहे हैं। शहर के कारोबारी इन बिलों को वसूलने का विरोध कर चुके हैं। कारोबारियों का साफ कहना है कि जब दुकानों और होटल खुले ही नहीं थे तो कूड़ा कहां से लिया गया और इसका बिल कैसे जारी किया गया। वहीं कारोबारी इस दौरान जारी बिजली और पानी के बिलों में राहत देने की गुहार लगा रहे हैं।
ऐसे में इन बिलों को माफ करने पर फैसला होगा। इसके अलावा नगर निगम के हाउस में शहर में होने वाले विभिन्न विकासात्मक कार्यों को लेकर भी मंथन होगा और कई प्रस्ताव भी इस दौरान पारित होने के आसार हैं। हालांकि मेयर सत्या कौंडल का कहना है कि लीज की संपत्तियों पर टैक्स का फैसला नगर निगम का हाउस करेगा। नगर निगम का प्रयास लोगों को राहत देने का रहेगा। हाउस में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
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