प्रदेश के करीब आठ लाख मनरेगा कामगारों को काम करने की अनुमति मिल गई है। लॉकडाउन के बाद से प्रदेश सरकार ने गांवों में मनरेगा के काम बंद करा दिए थे। इससे गांवों में विकास ठप होने के साथ ही कामगारों को दिहाड़ी लगाने का संकट खड़ा हो गया था। अब जब काम की अनुमति मिल है तो मरनेगा कामगारों को सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना होगा। पंचायती राज विभाग के निदेशक ललित जैन ने बुधवार को इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है।
अधिसूचना के तहत मनरेगा कामगारों को 14वें वित्तायोग और राज्य वित्तायोग से धनराशि का भुगतान किया जाएगा। मनरेगा के काम का 80 फीसदी भुगतान पहले कर दिया जाएगा। काम के मूल्यांकन के बाद शेष राशि का भुगतान होगा। पंचायत की बैठक में अनुमति के बिना मनरेगा के काम की धनराशि का भुगतान किया जाएगा। विभाग के निदेशक ललित जैन ने कहा कि प्रदेश में करीब 8 लाख मनरेगा कामगार हैं। अब प्रदेश में मनरेगा के तहत निजी कामों को किया जा सकेगा। इसके बाद शीघ्र मनरेगा के अन्य काम भी आरंभ होंगे।
अधिसूचना के तहत मनरेगा कामगारों को 14वें वित्तायोग और राज्य वित्तायोग से धनराशि का भुगतान किया जाएगा। मनरेगा के काम का 80 फीसदी भुगतान पहले कर दिया जाएगा। काम के मूल्यांकन के बाद शेष राशि का भुगतान होगा। पंचायत की बैठक में अनुमति के बिना मनरेगा के काम की धनराशि का भुगतान किया जाएगा। विभाग के निदेशक ललित जैन ने कहा कि प्रदेश में करीब 8 लाख मनरेगा कामगार हैं। अब प्रदेश में मनरेगा के तहत निजी कामों को किया जा सकेगा। इसके बाद शीघ्र मनरेगा के अन्य काम भी आरंभ होंगे।

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