कोरोना वायरस: वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी, काफी नहीं है एक लॉक डाउन, 2022 तक जारी रखनी होंगी ये पाबंदियां

कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण पूरे विश्व में अभी तक एक लाख 20 हजार से अधिक व्यक्ति अपनी जान गंवा चुके हैं. वहीं इस वायरस से संक्रमितों की संख्या 20 लाख को पार कर गई है. इस वायरस का अभी तक कोई ईलाज नहीं मिला है, ऐसे में इस वायरस का खौफ लोगों में साफ तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, विश्व स्वास्थ संगठन (WHO) ने साफ किया है कि इस वायरस से लड़ने के लिए लोग अगर सोशल डिस्टेंसिंग अपनाए और बाहर निकलते समय अपने मुंह को ढककर निकले तो बात बन सकती है, और इससे एक हद तक वायरस को फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है.
कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में पीएम मोदी ने पहले भारत में 21 दिनों के लॉक डाउन का ऐलान किया गया था, लेकिन देश में लगातार संक्रमितों की संख्या बढ़ती गई जिसके कारण इस देश में लॉक डाउन को 3 मई तक के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया गया है. पीएम मोदी ने साफ कहा है कि जिन इलाकों में कोरोना वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आएगा वहां से लॉक डाउन हटा दिया जाएगा. वहीं दूसरी तरफ वैज्ञानिकों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में एक बार लॉक डाउन काफी नहीं होगा. वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस महामारी को रोकने के लिए दूसरे उपाय भी करने होंगे.
जर्नल साइंस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में महामारी विशेषज्ञ और स्टडी के लेखक मार्क लिपसिच ने लिखा,'संक्रमण दो चीजें होने पर फैलता है- एक संक्रमित व्यक्ति और दूसरा कमजोर इम्यून वाले लोग. जब तक कि दुनिया की ज्यादातर आबादी में वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हो जाती है, तब तक बड़ी आबादी के इसके चपेट में आने की आशंका बनी रहेगी.'
वहीं रिपोर्ट में इस बात के लिए भी आगाह किया गया है कि अगर इस वायरस की दवा नहीं मिलती है तो 2025 में कोरोना वायरस एक बार फिर तबाही मचा सकता है. दूसरी तरफ ब्रिटेन की सरकार को सलाह देने वाली वैज्ञानिक सलाहकार समिति ने सुझाव दिया है कि सरकार को अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए लंबे वक्त तक सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की जरूरत है.
इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रोफेसर नील फार्ग्युसन ने एक शोध में इस बात का दावा किया है,'सोशल डिस्टेंसिंग जैसे कदम संक्रमण की धीमी रफ्तार के लिए बहुत जरूरी हैं.जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती, तब तक बड़े पैमाने पर सोशल डिस्टेंसिंग की जरूरत बनी रहेगी.'

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