प्राकृतिक जल स्रोतों का होगा सर्वे, व्यर्थ नहीं बहेगा पानी

हिमाचल प्रदेश में अनदेखी का शिकार हुए प्राकृतिक जल स्रोतों का सर्वे किया जाएगा और उनका पानी व्यर्थ नहीं बहेगा। इस पानी से लोगों के रोजमर्रा के कार्यों व पेयजल की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। इससे गर्मियों में होने वाला पेयजल संकट भी दूर होगा। केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को इस प्रोजेक्ट पर काम करने के आदेश दिए हैं और जल शक्ति विभाग जल्द यह कार्य शुरू करने जा रहा है। 

जिलों में विभाग की ओर से प्राकृतिक जल स्रोतों का सर्वेक्षण जल्द शुरू किया जाएगा, जिससे इनका जीर्णोद्धार कर इनके पानी को उपयोग के लिए लाया जा सके। इनमें तालाब, बावड़ियां, पानी के चश्मे, झरने आदि शामिल हैं। ऐसे तालाब जो अनदेखी के कारण मिट्टी से भरे पड़े हैं और जिसके कारण उनका पानी सूख जाता हैं, उन तालाबों को दोबारा जीवंत किया जाएगा। इनके जीर्णोद्धार के लिए केंद्र सरकार ने रेनोवेशन ऑफ ओल्ड वॉटर बॉडी प्रोजेक्ट राज्य को दिया है। 

विभाग इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजेगा और उसी के अनुसार बजट जारी होगा। मंडी जिले के सरकाघाट, धर्मपुर, संधोल, बल्ह आदि क्षेत्रों में इस योजना से लाभ मिलेगा। इससे लोगों को रोजमर्रा के कार्यों व पीने के पानी की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। उधर, इस बात की पुष्टि करते हुए मुख्य अभियंता मंडी धर्मेंद्र गिल ने कहा कि सरकार से अनुमति मिलने के बाद ही रेनोवेशन ऑफ ओल्ड वॉटर बॉडी प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाएगा।

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