अभी 2018-19 बैच के छात्रों को मिलेंगे लैपटॉप

 


टेंडर प्रक्रिया की पूरी, 2019-2020 सत्र के मेधावियों को करना होगा इंतजार

एक बार फिर से हिमाचल प्रदेश के मेधावी छात्रों को शिक्षा विभाग की ओर से बड़ा झटका लगा है। लंबे समय से लैपटॉप का इंतजार कर रहे स्कूल व कालेज के मेधावी छात्रों को और इंतजार करना होगा। हालांकि ‘दिव्य हिमाचल’ में छपी खबर के बाद विभाग ने लैपटॉप खरीद को लेकर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर दी है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉक्टर अमरजीत शर्मा ने इसकी पुष्टि की है । कहा जा रहा है कि पहले चरण में वर्ष 2018 . 2019 के छात्रों को ही लैपटॉप दिए जाएंगे। इसके साथ ही 19 और 2020 के छात्रों को इस साल के अंत तक भी लैपटॉप ना मिलने की उम्मीद नजर आ रही है। 

बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग केवल 2018. 2019 के 9800 छात्रों को ही लेपटॉप खरीद की की जिम्मेवारी प्राइवेट कंपनी को देगी। हालांकि इससे पहले सिविल सप्लाई छात्रों को वर्दी खरीद करती थी। इस बार लैपटॉप खरीद का टेंडर शिक्षा विभाग किसको देता है यह देखना है अहम होगा। फिलहाल लंबे समय से लैपटॉप क्या कर रहे छात्रों को राहत मिली है। वही जो छात्र ऑनलाइन स्टडी भी नहीं कर पा रही थेए अब ऑनलाइन स्टडी में किसी भी तरह की कोई बाधा उत्पन्न नहीं होगी।

बता दें कि प्रदेश में इस बार भी मेधावी छात्रों को लैपटॉप विभाग की ओर से समय पर आबंटित नहीं किए गए हैं। पहले जहां कोविड-19 की वजह लगाए गए लॉकडाउन के चलते लैपटॉप आबंटित करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी। शिक्षा विभाग ने 10 हजार मेधावियों को लैपटॉप देने हैं। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया जो पहले की जा रही थी, उसे भी शिक्षा विभाग ने कोविड की वजह से रद्द कर दिया था, लेकिन अब विभाग यह दावा कर रहा है कि जल्द ही लैपटॉप छात्रों को दे दिए जाएंगे। लैपटॉप की यह खरीद प्रकिया 2018-19 के सत्र के छात्रों के लिए की जानी है। इस से पहले भी सत्र 2017-18 के मेधावियों को शिक्षा विभाग की ओर से दो साल देरी से लैपटॉप आबंटित किए गए थे और इस बार भी इसी तरह की देरी इस पूरी प्रक्रिया में हो रही है।


तकनीकी समस्याओं से नहीं हो पाई थी खरीद


उच्च शिक्षा निदेशक डा. अमरजीत कुमार शर्मा ने कहा कि कुछ टेक्निकल समस्याएं लैपटॉप खरीद में सामने आ रही थीं, उनका समाधान कर लिया गया है। उम्मीद हैं कि जल्द ही छात्रों लैपटॉप मिल जाएंगे। वहीं, छात्रों के लैपटॉप कि खरीद में 23 से 24 करोड़ रुपए की लागत आएगी, जो सरकार की ओर से विभाग को दिया जाएगा।

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