प्रताप सिंह | नाहन
नाहन में प्रदेश की ही नहीं बल्कि उत्तर भारत की सबसे पुरानी नगर परिषद स्थानीय निकाय में पार्टीबाजी के अलावा कुछ आजाद उम्मीदवार समेत 34 उम्मीदवार मैदान में है। नाहन की जहां गलियां व सड़कें चुनावी प्रचार की सामग्री से अटी पड़ी हैं तो वहीं चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों ने अपने-अपने कार्यालयों को खोलकर चुनावी प्रचार युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है। चुनाव के दौरान अब नाहन शहर के लोग फिर से अपने-अपने वार्ड की समस्याओं को चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के सामने रख रहे हैं। सिरमौर रियासत के समय से नाहन शहर पूरे हिमाचल व उत्तर भारत में अपने सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध था, परंतु काफी समय से नाहन शहर के सौंदर्यीकरण की मुहिम धीमी पड़ गई थी। केवल बीते एक वर्ष में नाहन नगर परिषद द्वारा शहर के सौंदर्यीकरण की दिशा में अहम कदम उठाए गए थे, परंतु शहर में अभी कुछ ऐसी समस्याएं हैं जिनका समाधान होना शेष है। शहर के लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान हर समस्या के समाधान के लिए नेताओं द्वारा पूरा करने का आश्वासन दिया जाता है लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद लोगों की समस्याओं की तरफ कोई ध्यान नहीं देता है। पिछले चुनाव में किए वादे अब लोग पार्टी समर्थित प्रत्याशियों से पूछ रहे है कि इन समस्याओं को कौन सुलझाएगा।
शहर में बंदरों की समस्या भी बना प्रमुख मुद्दा : ऐसे में इस बार के चुनाव में नाहन शहर के लोग जहां शहर में बंदरों की समस्या को प्रमुख रूप से चुनावी मुद्दा बना रहे हैं तो वहीं शहर की सीवरेज लाइन भी विभिन्न वार्ड के लोग चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के समक्ष उठा रहे हैं। शहर के कई वार्ड ऐसे हैं जहां पर सीवरेज की लाइन खुली पड़ी है। कारणवश शहर के लोग खुली सीवरेज लाइन से परेशान हैं। इसके अलावा नाहन शहर में नगर परिषद द्वारा शहर को डस्टबिन फ्री रखने की मुहिम शुरू की गई थी, परंतु वार्डों में डस्टबिन न होने के कारण कई स्थानों पर कूड़े के ढेर खुले में लगे रहते हैं। डोर-टू-डोर कूड़ा एकत्रित करने की मुहिम भी पूरी तरह से अभी शहर में सिरे नहीं चढ़ पाई है। ऐसे में नाहन शहर के लोगों का कहना है कि जब तक शहर की मूलभूत सुविधाओं का निराकरण नहीं हो जाता है तब तक चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के सामने शहर के मुद्दे उठते रहेंगे। शहर में नगर परिषद की केवल तीन से चार स्थानों पर पार्किंग है और शहर के वाहनों के हिसाब से यह पार्किंग ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। ऐसे में शहर में नए पार्किंग स्थल विकसित करना भी नई नगर परिषद व चुनावी मैदान में उतरने वाले पार्षदों के उम्मीदवारों के सामने मुख्य रूप से सामने आ रही है।
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