हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी सहित काॅलेजाें में आगामी दिनाें में खुलने वाले हाॅस्टल प्रशासन के लिए गले की फांस बन सकते हैं। यूजीसी के नए नियमाें के अनुसार अब एचपीयू सहित काॅलेजाें में हाॅस्टलाें के कमरे शेयरिंग के आधार पर आवंटित नहीं किए जा सकेंगे। जबकि एचपीयू और काॅलेजाें के हाॅस्टलाें में अभी एक कमरे में दाे से तीन स्टूडेंट रखे जा रहे हैं।
कमराें की कमी के कारण यहां शेयरिंग सिस्टम लागू किया गया है। यूजीसी की ओर से जारी आदेश में साफ कहा गया है कि सुरक्षा और स्वास्थ्य निवारक उपायों का सख्ती से पालन करते हुए हॉस्टल सिर्फ वहां ही खोले जाएंगे, जहां बेहद आवश्यक हैं। हॉस्टल में कमरे साझा करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
जिन छात्रों में लक्षण हैं, उन्हें किसी भी परिस्थिति में हॉस्टल में रुकने की इजाजत नहीं दी जाएगी। एचपीयू के चीफ वार्डन प्राे. अजय अत्री का कहना है कि जिस तरह के आदेश सरकार और यूजीसी के हाेंगे। हम उसी तरह से छात्राें काे हाॅस्टल देंगे। हाॅस्टल जल्द ही अलाॅट किए जाएंगे। उसके बाद इसके लिए एसओपी जारी हाेगी।
फिलहाल आवेदन लिए जा रहे हैं, रहने काे नहीं दे रहे हाॅस्टल
एमएचआरडी की ओर से साफ निर्देश है कि छात्राें की भले ही एडमिशन करवा दाे, लेकिन एक साथ स्टूडेंट काे हाॅस्टल में नहीं रहने दिया जा सकता है। इस पर शिक्षा विभाग और हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी ने भी सभी काॅलेजाें काे निर्देश दिए हैं कि वे छात्राें काे अभी हाॅस्टल अलाॅट न करवाएं। जब तक नई गाइडलाइन नहीं आती है, तब तक हाॅस्टल अलाॅट न करवाएं। विवि प्रशासन ने छात्र-छात्राओं से हाॅस्टल के लिए आवेदन मांग लिए हैं।
संस्थानों में नहीं होगी 100 फीसदी उपस्थिति
यूजीसी कॉलेज खोलने को लेकर पहले ही निर्देश जारी कर चुका है। यूजीसी के आदेश के अनुसार सभी रिसर्च कोर्सेज के छात्र और साइंस टेक्नोलॉजी कोर्सेज के पोस्ट ग्रैजुएट छात्राें को पहले कॉलेज बुलाया जा सकता है, क्योंकि इनकी संख्या अन्य कोर्सेस के छात्रों से कम होती है। किसी भी संस्थान में छात्रों के 50 फीसदी से अधिक की उपस्थिति नहीं होगी।
स्टूडेंट्स को बनाए रखने होगी दूरी, मास्क जरूरी
- ऐसे छात्राें, जिनमें कोरोना संक्रमण के लक्षण होंगे, उन्हें कैंपस में रहने, यूनिवर्सिटी या कॉलेज हॉस्टल में रूम शेयर करने की अनुमति नहीं होगी।
- सोशल डिस्टेंसिंग समेत सभी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। 6 फीट की दूरी बनाए रखनी होगी। मास्क अनिवार्य होगा।
- अगर विवि और कॉलेज कंटेनमेंट जोन से बाहर हैं तो ही उन्हें खोलने की इजाजत दी जा सकती है। कंटेनमेंट जोन में रहने वाले छात्राें और शिक्षकों को कॉलेज में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी।
- छात्राें और स्टाफ को भी सलाह दी जाए कि वह कंटेनमेंट जोन में न जाएं। फैकल्टी, स्टाफ और छात्राें को आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
किस जिले में कितने हॉस्टलों की सुविधा
जिला शिमला: एचपीयू समेत आरकेएमवी, संजाैली, रामपुर और सरस्वती नगर सावड़ा में हाॅस्टल हैं। करीब 2500 स्टूडेंट रहते हैं। लाहाैल स्पीति, चंबा और किन्नाैर जैसे क्षेत्राें से स्टूडेंट यहां पढ़ाई करने के लिए आते हैं।
जिला साेलन: यहां 10 काॅलेजों में से तीन के पास हाॅस्टल सुविधा है। नालागढ़, अर्की में करीब 180 स्टूडेंट हाॅस्टल में रहते हैं।
जिला मंडी: यहां 17 काॅलेज है। सरकाघाट, बासा और मंडी वल्लभ काॅलेज में हाॅस्टल की सुविधा है। करीब 350 स्टूडेंट हाॅस्टल में रहते हैं। यहां पर भी हाॅस्टल के कमराें की काफी कमी हैं।
जिला कांगड़ा: इस जिले में करीब 28 काॅलेज हैं। आठ काॅलेज ऐसे हैं, जहां पर हाॅस्टल की सुविधा छात्र छात्राओं काे मिल रही है। 400 के करीब स्टूडेंट हाॅस्टल में रहते हैं, इनकाे अब मुश्किल हाेगी। इसी तरह चंबा में तीन काॅलेज हैं। जिनमें एक में हाॅस्टल की सुविधा मिलती है।
जिला बिलासपुर, सिरमाैर, हमीरपुर: यहां क्रमश: तीन, 14 और 6 काॅलेज हैं। यहां करीब 250 स्टूडेंट हाॅस्टल में रहते हैं। अगर हाॅस्टल नहीं मिलता है ताे छात्राें काे मजबूरन महंगा किराए का कमरा लेना हाेगा।
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