जनजातीय जिला लाहुल-स्पीति मुख्यालय केलांग से मरीज को लेकर एंबुलेंस कुल्लू तो पहुंच गई, लेकिन वापसी में मुश्किल हो गया। सड़क पर टीम का सफर हिमपात दोनों एक साथ जारी थे। बर्फ की परत और मोटी होती जा रही थी, लेकिन पायलट और दो फार्मासिस्टों का मनाली लौटना जरूरी था। आखिर बेलचा उठाया और बर्फ को हटाना शुरू कर दिया। बर्फ हटाकर ये राह बनाते रहे और आगे बढ़ते रहे। हालांकि इसके चलते महज 4 किलोमीटर का सफर तय करने में टीम को डेढ़ घंटे से ज्यादा का वक्त लग गया।
मिली जानकारी के अनुसार दो दिन पहले सरकारी सेवा की डायल-108 की एक एंबुलेंस शाम के समय एक मरीज को लेकर केलांग से कुल्लू आई थी। मरीज को छोड़ने के बाद सोमवार को यह एंबुलेंस वापस केलांग लौट रही थी तो इस दौरान एंबुलेंस के पायलट और फार्मासिस्टों को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। एंबुलेंस में तैनात पायलट गोपाल बोध के मुताबिक जब केलांग से मरीज को कुल्लू की तरफ ला रहे थे तो मनाली से की तरफ से टनल पार करते हुए नोर्थ पोर्टल पर बर्फबारी के बीच से गुजरना पड़ा। इसके बाद वापसी में टनल रोहतांग के साउथ पोर्टल पर धूंधी के पास कई जगह रास्ते से बर्फ हटानी पड़ी। यहां से -5 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच करीब डेढ़ फुट मोटी परत पर एंबुलेंस को आगे बढ़ाना बड़ी चुनौती था।
लिहाजा, गोपाल बोध, फार्मासिस्ट जयललिता और लक्ष्मी चंद ने खुद ही एंबुलेंस के भीतर पड़ा बेलचा उठाया और सड़क से बर्फ हटाना शुरू किया। एंबुलेंस के लिए रास्ते बनाते गए और आगे बढ़ते गए। तीनों के सामने चुनौती यह थी कि एक तरफ जहां सड़क पर लगातार मोटी होती जा रही बर्फ की परत को हटाना था, वहीं पहाड़ियों से आ रही बर्फीली हवा उनकी मुसीबत और बढ़ा रही थी। लगभग डेढ़ घंटे में जैसे-तैसे करीब चार किलोमीटर के इस सफर को पूरा किया। इसके बाद BRO की मशीनरियां स्नोकटर, JCB मिले तो आगे का सफर सुगम बना।
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