हिमाचल में ओलावृष्टि सेब पर हर साल कहर बरपाती है। हर साल करीब साठ फीसदी सेब की फसल ओलों से खराब हो जाती है। ओलों से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अभी तक कोई भी स्कीम लागू नहीं हो पाई है। बागबान लंबे समय से ओलों से भरपाई के लिए स्कीम लागू करने की मांग करते रहे हैं, मगर अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाए गए। अबकी बार भी कई इलाकों में ओलों ने सेब को नुकसान पहुंचाया है। लेकिन बागबानों को न तो मुआवजा मिला और नहीं उनके सेब को उचित दाम मिले।
हिमाचल में सेब की आर्थिकी करीब पांच हजार करोड़ रुपए की है। कई बागबान सेब की नई किस्मों के सेब उगा रहे हैं। मगर अभी भी सेब प्राकृतिक आपदाओं से अछूता नहीं रहा है। राज्य में ओलों से हर साल करोडों की फसल खराब हो जाती है। मार्च अप्रैल से लेकर जून माह तक हर साल सेब पर ओलों को खतरा हर साल मंडराता है। हर साल एक बड़े क्षेत्र पर ओलावृष्टि होती है, जो कि बागबानों की पूरे साल की कमाई को बर्बाद कर देता है।
अबकी बार भी कई इलाकों सेब की फसल हुई बर्बादः
हिमाचल में इस साल भी ओलों ने सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। शिमला जिला कोटखाई, ठियोग, चौपाल, रामपुर के साथ कुल्लू जिला के कई इलाकों में ओलों ने सेब की फसल बर्बाद कर दी। ओलों से अबकी बार करीब एक सौ करोड़ की फसल नष्ट हो गई। मगर इसके बदले बागबानों को मुआवजा नहीं मिल पाया। बागबानों के विभिन्न संगठन समय-समय पर फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा देने की आवाज उठाते रहे हैं मगर इसका नतीजा कुछ भी नहीं निकलता।
एंटीहेल नेट भी अधिकांश बागबान नहीं खरीद पा रहेः सेब के बागीचों को ओले से बचाने के लिए एक उपाय एंटीहेल नेट लगाने का है। प्रदेश में सरकार ने एंटीहेल नेट खरीदने पर बागबानों के लिए सब्सिडी पर देने का प्रावधान भी किया है, मगर इसका लाभ सभी बागबान नहीं उठा पाते। हिमाचल में अधिकांश बागबान छोटेे और मध्यम वर्गीय है जो कि अपनी आजीविका जैसे-तैसे सेब से कमाते हैं।
ऐसे में अधिकांश बागबान एंटीहेल नेट खरीदने की स्थिति में नहीं हैं। इन बागबानों के पास इतना पैसा नहीं होता कि ये एंटीहेल नेट खरीद सके क्योंकि पहले बागबानों को ये नेट अपने पैसों से खरीदनी पड़ती है और बाद में इसकी सब्सिडी मिलती है। बजट का कम प्रावधान होने के कारण सब्सिडी लेने में काफी समय लग जाता है। इस तरह एंटीहेल नेट खरीदना छोटे बागबानों की क्षमता से बाहर है।
हर साल करोड़ों की फसल होती है बर्बादः
यंग एडं यूनाइटेड ग्रोवर ऐसोसिएशन के सचिव प्रशांत सहेटा का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में ओलावृष्टि से सबसे अधिक नुकसान सेब को होता है। हर साल करोड़ों की फसल ओलों से खराब हो रही है। ऐसे में सरकार को ओलों से नुकसान के लिए मुआवजे का प्रावधान करना चाहिए ताकि बागबानों को कुछ राहत मिल सके। वहीं एंटीहेल नेट योजना के लिए अधिक बजट का प्रावधान किया जाना चाहिए। जिससे कि सभी बागबान इसका लाभ उठा सकंे और अपनी सेब की फसल को बचा सकंे।
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