एनएचएआई की लगातार जारी लापरवाही को देखकर लोहारड़ा गांव के करीब आधा दर्जन लोगों ने खुद ही नेशनल हाईवे के तमाम गड्ढों को भरने का बीड़ा उठा लिया है। मंगलवार से शुरू किए गए इस काम में काफी गड्ढे भर दिए गए हैं। तकरीबन साढ़े छह किमी लंबे हमीरपुर बाईपास रोड की हालत अरसे से बेहद खराब चल रही है। इसीलिए रोजाना हो रही छोटी-छोटी दुर्घटनाएं इलाके के लोगों को विचलित कर रही हैं।
इसीलिए उन्होंने खुद ही अपने पैसे से इन एक डेढ़-डेढ़ फीट के गहरे गड्ढों को भरने का काम शुरू कर दिया। लेकिन लगता है एनएचएआई के हमीरपुर स्थित कार्यालय पर इसका कोई असर पड़ेगा? यह तो समय ही बताएगा। मगर इतना जरूर दिख रहा है कि सरकारी तंत्र किस हिसाब से काम करता है। उसे लोगों की समस्या की जरा भी परवाह नहीं है। पिछले 6 माह से इस रोड पर बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। मगर बड़े-बड़े पैच बाद में लग जाएं, छोटे-छोटे गड्ढों को भरने में आखिर हर्ज क्या है। जिनकी वजह से दोपहिया वाहन चालकों को सबसे बड़ी परेशानी होती है।
गाड़ी में पानी की टंकी, सीमेंट, रेत-बजरी रखकर भर रहे गड्ढे
गांव के राजेश कुमार, रवि शर्मा, राजेश डोगरा, सुरेंद्र मेहरा, राजेश कुमार,सतीश कुमार ने बताया कि उन्होंने एक छोटे वाहन में पानी की टंकी, सीमेंट की बोरियां, रेत और बजरी भरकर जहां-जहां गड्ढे हैं, उन्हें भरने का काम मंगलवार सवेरे से ही शुरू किया है। क्योंकि अब इधर से होकर जितने भी वाहन चालक गुजर रहे हैं, गड्ढों की वजह से कई बार छोटी-छोटी दुर्घटनाएं हो रही हैं, और यह स्थिति उनसे देखी नहीं जा रही। इसलिए 10-20,30 जितनी भी सीमेंट की बोरी लगेगी, इस काम को अंजाम देने के बाद ही वे विश्राम करेंगे।
ठेकेदार को दिया है काम लेकिन वो कर नहीं रहाः एनएचएआई के हमीरपुर स्थित डायरेक्टर योगेश रावत का कहना है कि 3 माह पहले इस रोड का करीब 22 लाख का टेंडर बिलासपुर के ठेकेदार को अवार्ड किया गया था। मगर बार-बार कहने के बावजूद वह काम नहीं कर रहा है। इसीलिए इसमें विलंब हुआ है। उनका कहना है कि निश्चित रूप में इस रोड़ के गड्ढों की स्थिति खराब है लेकिन मरम्मत के काम के बाद यह बेहतर हो जानी थी फिलहाल यहां पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज का काम दो जेसीबी के जरिए शुरू कर दिया गया है। यदि वह ठीक नहीं हो रहा तो इस पर कार्रवाई होगी।
ड्रेनेज की होनी चाहिए सही व्यवस्थाः बारल और लोहारड़ा के लोगों की एक और समस्या यह भी है कि जब यह बाईपास बना, तो ड्रेनेज प्रॉपर नहीं बनी और अब ड्रेनेज का पूरी तरह नामोनिशान नहीं रहा है। जिस वजह से बरसात का सारा पानी निचले इलाके के गांव में भर रहा है। उनके खेतों में जा रहा। गांव तक इसकी दस्तक हो रही है और ज्यादा बारिश हो जाए, तो फिर घरों में भी यह पानी घुस जाता है। ड्रेनेज का काम यहां प्रॉपर हो जाए तो लोगों को राहत मिले।
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