डीडीयू अस्पताल में काेराेना पाॅजिटिव महिला की आत्महत्या के मामले में सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। अस्पताल में तैनात एमएस डाॅ. लाेकेंद्र शर्मा काे सरकार ने हटा दिया है। इनकी जगह हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में नियुक्त डाॅ. रमेश चाैहान काे एमएस लगाया गया है। सरकार ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। माना जा रहा है कि अस्पताल में महिला के सुसाइड के बाद यह कार्रवाई तय थी।
इस मामले में कांग्रेस ने दाेपहर काे दाे बड़े प्रदर्शन भी किए थे, जिसमें उन्हाेंने डीडीयू अस्पताल में लापरवाही बरतने के आराेप लगाए थे। उसके तुरंत बाद ही सरकार ने यह कार्रवाई की। डाॅ. लाेकेंद्र शर्मा डीडीयू अस्पताल के कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक थे। घटना के दिन वह छुट्टी पर थे। मामले की मजिस्ट्रिअल जांच भी जारी है।
ऐसे में इस लापरवाही में अब अन्य स्टाफ पर भी कार्रवाई की जा सकती है। मामले में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने डीडीयू अस्पताल का स्टाफ भी तलब किया है और मामले में पूरी रिपाेर्ट ली। सीएम ने कहा था कि मामले में कार्रवाई की जाएगी। दाेषियाें काे छाेड़ा नहीं जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी भी इसमें पूरी जानकारी ले रहे हैं। इसकी जांच के लिए एक कमेटी भी गठित की गई है। जाे अपने स्तर पर जांच करेगी। ऐसे में अब इस मामले अन्य स्टाफ पर भी कार्रवाई हाे सकती है। सरकार ऐसी लापरवाही की जांच में काेई काेताही नहीं छाेड़ना चाहती।
ये हुआ था डीडीयू में
मंगलवार रात काे चाैपाल की 54 वर्षीय काेराेना पाॅजिटिव महिला ने डीडीयू अस्पताल की तीसरी मंजिल में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। परिजनाें ने आराेप लगाए हैं कि महिला काे खाना, पानी और दवाई समय पर नहीं दी जाती थी। जाे सामान परिजन बाहर से देते थे, वह भी समय पर मरीजाें काे नहीं दिया जाता था। महिला ने अपने घरवालाें काे फाेन पर इस बारे में बताया था। मामले में मजिस्ट्रियल जांच चल रही है। 10 दिनाें में इसकी रिपाेर्ट आएगी। उसमें महिला की माैत के कारणाें का पता चल जाएगा।
नहीं है काेविड सेंटर में सीसीटीवी कैमरा
काेविड सेंटर डीडीयू में अभी तक काेई सीसीटीवी भी नहीं है। ऐसे में यहां पर मरीजाें काे किस तरह की असुविधाएं या परेशानी हाेती है, इसकी जांच करना भी कठिन है। सीसीटीवी हाेता ताे इसकी फुटेज से काफी मदद मिल सकती थी। हालांकि अब जांच में यहां पर माैजूद काेराेना पेशेंट काफी अहम भूमिका निभाएंगे। उनसे जांच अधिकारी यहां पर सुविधाओं के बारे में बात कर सकते हैं। उनका बयान भी अब जांच में काफी मदद कर सकता है। हालांकि हाईकाेर्ट की निगरानी में एक ज्यूडिशियल कमेटी काेराेना मरीजाें से वीडियाे काॅल पर बात करती है। वह यहां पर सुविधाओं का पता समय-समय पर करती रहती है।
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