जांच अधिकारी ने सौंपी मंत्रालय को रिपोर्ट, फैसले के इंतजार में टिकी सभी की निगाहें

अनियमितताओं के आरोपों की वजह से सुर्खियों में आए एनआईटी के डायरेक्टर विनोद यादव के खिलाफ हुई जांच की रिपोर्ट जांच अधिकारी ने कुछ दिन पहले मंत्रालय को सौंप दी है। यह रिपोर्ट एक माह के भीतर सौंपी जानी थी, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त समय लिया था। एआईसीटीई के चेयरमैन अनिल सहस्त्रबुद्धे ने संस्थान के कैंपस में संबंधित कई लोगों से जुलाई माह में पूछताछ कर रिकॉर्ड को कब्जे में लेकर इस जांच को मुकम्मल किया था। बाद में कुछ दस्तावेज और मंगवाए थे। क्योंकि मामला आरोपों का था, इसलिए उनकी तह से जांच करने में अतिरिक्त समय लगा। अब जांच रिपोर्ट उन्होंने मानव संसाधन मंत्रालय को सौंप कर दी है। लिहाजा जांच का जिन्न कब तक बाहर निकलेगा? इसकी इंतजार होने लगी है।

भास्कर ने इस मुद्दे को शुरू से ही उठाया। डायरेक्टर पर आरोप तो गंभीर लगे थे, लेकिन इनका सिलसिला काफी समय तक जब जारी रहा तो मामला काफी तूल पकड़ा था। विधायक राजेंद्र राणा ने भी इसे जोर शोर से उठाने का प्रयास किया। बाद में केंद्रीय राज्य वित्त मंत्री और हमीरपुर के सांसद अनुराग ठाकुर ने केंद्रीय मंत्री से मिलकर मामले की जांच का मुद्दा उठाया और कुछ ही दिनों में जांच अधिकारी नियुक्त हुए। अब जांच मुकम्मल हो चुकी है, इसीलिए इस सारे मामले में देखने वाली बात यही होगी कि राजनीति का प्रभाव मंत्रालय पर पड़ेगा या नहीं? क्या जांच का वास्तविक रूप सामने आएगा या फिर फैसला लेने में लंबा समय बीतेगा।

क्योंकि यादव को जान से पहले छुट्टी पर भेज दिया था और एनआईटी जालंधर के डायरेक्टर डॉ ललित अवस्थी को यहां का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया था। उसके बाद रजिस्ट्रार को भी हटाकर योगेश गुप्ता की तैनाती की गई थी। कुछ और फेरबदल भी हुए थे। उधर लैब पर 15 करोड़ की राशि को विभागों में कैसे खर्चा जाएगा? इस पर भी अप्रूवल मिल गई है।

कंप्यूटर सेंटर पर 630 लाख, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 140 लाख, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 114, मैथमेटिक्स एंड साइंटिफिक कंप्यूटिंग में 35, मैटेरियल्स साइंस एंड इंजीनियरिंग में 52, केमिकल इंजीनियरिंग में 50, सिविल इंजीनियरिंग में 96, इंजीनियरिंग वर्कशॉप में 62, मैनेजमेंट स्टडीज में 25, फॉर्मेलिटी एंड सोशल साइंस में 40, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में 70, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में भी 70, केमिस्ट्री में 50, आर्किटेक्चर में 12, और फिजिक्स एंड फोटोनिकस साइंस में 50 लाख खर्चा किया जाएगा। इसके अलावा ऑनलाइन क्लासेज के लिए 75 लैपटॉप या नोटबुक्स भी खरीदे जाएंगे। जिसमें यूजी, पीजी और पीएचडी स्तर पर यह कोविड-19 में जरूरी है।



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