उपमंडल नालागढ़ में रविवार को राज्य कार्यकारी अधिकारी की परीक्षा आयोजित हुई। नालागढ़ डिग्री कॉलेज व दून वैली स्कूल में सेंटर बनाए गए थे, जिसमें से 271 अभ्यार्थियों ने सोशल डिस्टेंसिंग के ध्यान रखते हुए परीक्षा दी जबकि 171 अभ्यर्थी परीक्षा देने नहीं पहुंचे। करीब साढ़े नौ बजे दून वैली स्कूल के सेंटर में चंडीगढ़ से एबुलेंस में आई दो कोरोना संक्रमित छात्राओं को परीक्षा में बैठने नहीं दिया, क्योंकि स्थानीय प्रशासन के पास कोरोना संक्रमित छात्राओं की कोई सूचना नहीं थी। परीक्षा में बैठने की अनुमति न मिलने पर मामला काफी गर्मा गया।
छात्राओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि हमें प्रशासन की लापरवाही के कारण आज खामियाजा भुगतना पड़ा है। जब यह मामला एसडीएम नालागढ़ के पास पहुंचा तो जांच करते हुए पाया कि छात्राओं द्वारा किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई थी। जिसके बाद आयोग के अधिकारियों से बातचीत करते हुए परीक्षा में बैठने की अनुमति नही दी।
बता दें कि जिला सोलन में परीक्षा देने वाले कोविड पॉजिटिव मरीजों के लिए नौणी विवि में सेंटर चयनित किया गया था, ताकि एक ही सेंटर पर संक्रमित उम्मीदवार को परीक्षा में बैठने के इंतजाम किए जा सके। ऐसे में छात्राओं द्वारा समय पर सूचित नहीं होने के चलते एडमिट कार्ड पर भी सेंटर नहीं बदला गया था। इसके चलते दोनों छात्राएं नालागढ़ के दून वैली स्कूल में परीक्षा देने पहुंच गई।
छात्राओं का दावा: आयोग हेल्पलाइन पर किया था सूचित : छात्राओं ने कहा कि लोक सेवा आयोग के हेल्प लाइन नंबर पर सूचित किया गया था कि रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। इसके चलते चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा एबुलेंस का इंतजाम करते हुए भेजा गया था। उन्होंने आरोप लगाए कि हेल्पलाइन नंबर पर दस्तावेज भी ईमेल के माध्यम से भेजे थे। इसके बावजूद भी परीक्षा में बैठने की परमिशन नहीं दी ।
कोरोना संक्रमित अभ्यार्थियों की कोई सूचना नही थी। इस बारे में आयोग के अधिकारियों से बातचीत करने के बाद फैसला लिया गया कि उन्हें परीक्षा में बैठने नही दिया जाएगा। जबकि उन्हें समय रहते नौणी विवि में कोविड मरीजों के लिए बनाए गए सेंटर में जाकर परीक्षा देने का आग्रह किया था।
-महेंद्र पाल, एसडीएम, नालागढ़
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