नई दिल्ली - केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिये हैं कि कोरोना महामारी के कारण देश भर में लागू पूर्ण बंदी के दौरान विभिन्न त्योहारों के अवसर पर किसी को भी सामाजिक, धार्मिक या अन्य समारोह की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। राज्यों से कहा गया है कि वे जिला प्रशासनों और अन्य फील्ड एजेंसियों को पूर्णबंदी के मद्देनजर जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराने को कहें और कानून तथा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाएं।
सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार और प्रचार को रोकने के लिए भी कड़ी नजर रखी जानी चाहिए। गृह मंत्रालय ने कहा है कि सभी राज्यों को पूर्ण बंदी से संबंधित दिशा-निर्देशों का सब जगह प्रचार और प्रसार करना चाहिए, जिससे सबको इनके बारे में पता रहे और वे इनका उल्लंघन न करें। यह भी बताया जाना चाहिए कि इन दिशा निर्देशों का पालन नहीं करने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत जुर्माना और कार्रवाई की जा सकती है। इन दिशा-निर्देशों के नियम नौ और 10 में कहा गया है कि पूर्णबंदी के दौरान किसी भी तरह के सामाजिक और धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
लॉकडाउन नहीं करते, तो अब तक देश में सामने आते आठ लाख से ज्यादा केस
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों के लिए देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी। फिलहाल भारत में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन है और अभी तक 6000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। वहीं विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा है कि अगर भारत मे लॉकडाउन नहीं हुआ होता, तो यहां मामले आठ लाख से ज्यादा हो गए होते। विदेशी पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर देश में लॉकडाउन नहीं किया गया होता, तो 15 अप्रैल तक देश में कुल मामलों की संख्या आठ लाख 20 हज़ार हो गई होती, जबकि अभी हम 6000 तक हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादा महत्त्वपूर्ण ये भी है कि ज्यादातर मामले 78 जिलों में स्थानीय संक्रमण के हैं। यहां भारत मे कुल मामलों का 80 फीसदी है।
सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार और प्रचार को रोकने के लिए भी कड़ी नजर रखी जानी चाहिए। गृह मंत्रालय ने कहा है कि सभी राज्यों को पूर्ण बंदी से संबंधित दिशा-निर्देशों का सब जगह प्रचार और प्रसार करना चाहिए, जिससे सबको इनके बारे में पता रहे और वे इनका उल्लंघन न करें। यह भी बताया जाना चाहिए कि इन दिशा निर्देशों का पालन नहीं करने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत जुर्माना और कार्रवाई की जा सकती है। इन दिशा-निर्देशों के नियम नौ और 10 में कहा गया है कि पूर्णबंदी के दौरान किसी भी तरह के सामाजिक और धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
लॉकडाउन नहीं करते, तो अब तक देश में सामने आते आठ लाख से ज्यादा केस
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों के लिए देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी। फिलहाल भारत में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन है और अभी तक 6000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। वहीं विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा है कि अगर भारत मे लॉकडाउन नहीं हुआ होता, तो यहां मामले आठ लाख से ज्यादा हो गए होते। विदेशी पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अगर देश में लॉकडाउन नहीं किया गया होता, तो 15 अप्रैल तक देश में कुल मामलों की संख्या आठ लाख 20 हज़ार हो गई होती, जबकि अभी हम 6000 तक हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादा महत्त्वपूर्ण ये भी है कि ज्यादातर मामले 78 जिलों में स्थानीय संक्रमण के हैं। यहां भारत मे कुल मामलों का 80 फीसदी है।


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