अधिकार जता हर कहीं धरने पर नहीं बैठ सकते सुप्रीम कोर्ट का फैँसला


सुप्रीम कोर्ट का शाहीन बाग प्रदर्शन के फैसले पर पुनर्विचार से इनकार

अदालत ने कहा; अचानक प्रदर्शन हो सकते हैं, पर लंबे समय तक सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा नहीं


नागरिक संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग में हुए प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया। शनिवार को याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि विरोध का अधिकार, कभी भी और कहीं भी नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि राइट टु प्रोटेस्ट का यह मतलब यह नहीं कि जब और जहां मन हुआ, प्रदर्शन करने बैठ जाएं।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कुछ अचानक प्रदर्शन हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक असहमति या प्रदर्शन के लिए सार्वजनिक स्थानों पर लगातार कब्जा नहीं किया जा सकता है, जिससे दूसरे लोगों के अधिकार प्रभावित हों। पीठ ने कहा कि हमने समीक्षा याचिका और सिविल अपील पर गौर किया है और आश्वस्त हैं कि जिस आदेश की समीक्षा करने की मांग की गई है, उसमें पुनर्विचार किए जाने की जरूरत नहीं है। पीठ ने हाल में  फैसला पारित करते हुए कहा कि पीठ ने पहले के न्यायिक फैसलों पर विचार किया और गौर किया कि प्रदर्शन करना और असहमति व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन उसमें कुछ कर्त्तव्य भी हैं।

पिछले साल यह दिया था फैसला

उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल सात अक्तूबर को फैसला दिया था कि सार्वजनिक स्थलों पर अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं जमाए रखा जा सकता है और असहमति के लिए प्रदर्शन निर्धारित स्थलों पर किया जाए। इस फैसले में कहा गया था कि शाहीन बाग इलाके में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन में सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा स्वीकार्य नहीं है।

प्रदर्शन में शामिल 16 किसान अब भी लापता

नई दिल्ली। किसान आंदोलन तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने आरोप लगाया है कि किसानों को फर्जी मामलों में फंसाया जा रहा है, उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। इतना ही नहीं, किसान नेताओं ने संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि ट्रैक्टर मार्च में शामिल 16 किसान अभी भी लापता हैं। संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि 14 एफआईआर के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने 122 किसानों को गिरफ्तार किया है। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने आरोप लगाया है कि किसानों को फर्जी मामलों में फंसाया जा रहा है, उनका उत्पीड़न किया जा रहा है।

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