पंचायतों के लिए कुल 51 लाख 50 हजार मतदाता
हिमाचल प्रदेश के 40 हजार युवा पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इन युवाओं को इस बार पंचायती राज संस्थाओं के जरिए अपना वोट डालने का मौका मिल रहा है। ग्रामीण संसद के चयन में ये युवा अपनी आहुति डालेंगे और अपने पसंदीदा उम्मीदवार का चुनाव करेंगे। पंचायती राज चुनाव के लिए तैयारियां चल रही हैं। शहरी निकाय के चुनाव हो चुके हैं। कुल मतदाता 55 लाख से ज्यादा दर्ज किए गए थे, मगर अब नए नगर निगम और नगर पंचायतें बनने से मतदाता उसमें बंट गए हैं। ऐसे में पंचायती राज संस्थाओं के लिए इस बार 51 लाख 50 हजार मतदाता हैं, जो वोटर लिस्ट में दर्ज हैं। इनमें से 40 हजार मतदाता युवा हैं और इस बार 18 साल के हुए हैं जिनको वोट डालने का अधिकार इस चुनाव में प्राप्त होने जा रहा है।
बता दें कि पंचायती राज संस्थाओं के इस चुनाव में 81 हजार 672 प्रंत्याशी मेदान में हैं, जबकि 30043 पदों के लिए यह चुनाव हो रहा है। इसमें प्रधान, उपप्रधान, वार्ड मेंबर शामिल हैं, वहीं जिला परिषद व पंचायत समिति के सदस्य भी इसमें शामिल हैं। राज्य में तीन चरणों में पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव होना है जो यहां पर 17 जनवरी, 19 जनवरी व 21 जनवरी को होंगे। 23 जनवरी तक नई ग्रामीण संसद को बिठा दिया जाएगा। (एचडीएम)
कहां; किस दिन चुनाव, पता नहीं
पंचायती राज के चुनाव की बात करें, तो अब तक यह क्लीयर नहीं है कि किस पंचायत में किस तारीख को चुनाव होगा। लोगों को इस पर जिला के निर्वाचन अधिकारी कोई जानकारी नहीं दे पा रहे हैं, जिस पर चुनाव आयोग से सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि तीन चरण में चुनाव होना है, इसलिए लोगों को समय पर इसकी जानकारी होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है।
वोटर लिस्ट में नाम होना जरूरी
वोटर लिस्ट और पहचान पत्र को लेकर भी असमंजस चल रहा है। इस पर बार-बार चुनाव आयोग से सवाल पूछे जा रहे है। साफ किया गया है कि वोटर लिस्ट में जिसका नाम है, वही वोट डालने का अधिकार रखता है। जिसके पास वोटर आईडी कॉर्ड है, उसे वोट देने का अधिकार इससे नहीं मिलता, बल्कि केवल पहचान मिलती है। ऐसे में मतदाता सूची में नाम होना बेहद जरूरी है।

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