शिमला-हिमाचल प्रदेश को एक बड़ा तोहफा मिला है। सतलुज नदी पर प्रस्तावित लूहरी जलविद्युत परियोजना के पहले चरण को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट की सभी बाधाएं दूर हो गई हैं। अब इसी महीने सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड इसके काम को अवार्ड कर देगा और तीन महीने में इस प्रक्रिया को पूरा करके काम शुरू कर दिया जाएगा। इससे पहले एसजेवीएन के धौलासिद्ध प्रोजेक्ट को भी केंद्रीय मंजूरी मिल चुकी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीई) ने शिमला एवं कुल्लू जिलों में सतलुज नदी पर निर्मित की जा रही एसजेवीएन की 210 मेगावाट की लूहरी- चरण एक परियोजना के लिए 1810.56 करोड़ रुपए के निवेश का अनुमोदन प्रदान किया है। इसमें इनेबलिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए भारत सरकार से 66.19 करोड़ रुपए की बजटीय सहायता भी शामिल है, जिससे विद्युत टैरिफ को कम करने में सहायता मिली है।
एसजेवीएन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नंद लाल शर्मा ने बताया कि लूहरी जलविद्युत परियोजना को प्रारंभ में एकल चरण परियोजना के रूप में परिकल्पित किया गया था। हिमाचल सरकार के साथ एमओयू 27 अक्तूबर, 2008 को हस्ताक्षरित किया गया था।
मार्च, 2015 में प्रदेश सरकार ने एसजेवीएन को लूहरी जलविद्युत परियोजना की समीक्षा तथा बहुचरणीय परियोजना के रूप में संभावना तलाशने का परामर्श दिया। परियोजना को तीन चरणों 210 मेगावाट लूहरी-चरण एक, 172 मेगावाट लूहरी-चरण दो तथा 382 मेगावाट सुन्नी बांध जलविद्युत परियोजना के रूप में पुनः डिजाइन किया गया तथा सभी तीन परियोजनाएं एसजेवीएन को 29 अगस्त, 2017 को पुनः आबंटित किया।
इसके पश्चात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में राइजिंग हिमाचल ग्लोबल इनवेस्टर मीट-2019 के दौरान स्टैंड एलोन आधार पर इन परियोजनाओं के निष्पादन को प्रदेश सरकार के साथ एमओयू हस्ताक्षरित किए गए। एसजेवीएन के सीएमडी नंद लाल शर्मा ने बताया कि 210 मेगावाट की लूहरी- चरण एक जलविद्युत परियोजना को बिल्ड, ओन, ऑपरेट, मेंटेन बूम आधार पर हिमाचल प्रदेश के शिमला एवं कुल्लू जिलों में राष्ट्रीय राजमार्ग 05 के साथ नीरथ गांव के समीप सतलुज नदी पर निर्मित किया जा रहा है।
उन्होंने विद्युत एवं एमएनआरई के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार आरके सिंह, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का समय पर स्वीकृतियों को सुगम बनाने में निरंतर मार्गदर्शन एवं सहायता के लिए आभार व्यक्त किया।
लूहरी परियोजना की विशेषताएं
210 मेगावाट की लूहरी-चरण एक जलविद्युत परियोजना तीन घंटे 40 मिनट के लिए पीकिंग जलाशय के साथ एक रन ऑफ. दि रिवर योजना है। 80 मीटर ऊंचा, 225 मीटर लंबा तथा आठ मीटर चौड़ा एक कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाएगा, जिससे लगभग छह किलोमीटर के जलाशय का निर्माण होगा। बांध निर्माण को सक्षम करने के लिए नदी के प्रवाह को 10 मीटर के ब्यास एवं 567 मीटर लंबी हॉर्स शू आकार की डायवर्जन टनल के माध्यम से मोड़ा जाएगा। 644 क्यूमेक्स के डिस्चार्ज का उपयोग चार इनटेकों के माध्यम से किया जाएगा, जो 90 मीटर लंबे चार पेनस्टॉक से गुजरते हुए टरबाइनों में प्रवेश करेगा।
परियोजना सतलुज नदी के दाहिने किनारे पर प्रत्येक 80 मेगावाट की दो मुख्य इकाइयों तथा प्रत्येक 25 मेगावाट की दो सहायक इकाइयों से युक्त डैम.टो विद्युत गृह के रूप में अभियोजित है। परियोजना से सालाना 758 मिलियन यूनिट का विद्युत उत्पादन होगा। 62 माह की निर्धारित समय सीमा के अंदर इस परियोजना को पूरा किया जाएगा।

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