नजदीकी कटियारा गांव में फूड प्वाइजनिंग के मामले के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने भी अपने स्तर पर पेयजल स्कीम से पानी के सैंपल लिफ्ट किए। इन सैंपल को जांच के लिए भेज दिया गया। हालांकि अब वहां नया मरीज कोई सामने नहीं आया है लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जो अब तक मरीज सामने आए हैं उनका फॉलोअप कर उनके स्वस्थ की जांच की।
वही जो प्रारंभिक बात सामने आ रही थी कि महिला की मौत के बाद जो परिजनों की ओर से चने प्लास्टिक के लिफाफे में बंद करके रखे थे वह बात सही नहीं पाई गई है हालांकि अब यह बात भी सामने आ रही है कि उस में फंगस नहीं था। वही बुजुर्ग मृतक महिला के बेटे राजकुमार का कहना है की जो चने परिवार में बांटे गए थे उन्हें साफ करके रखा गया था।
जिन लोगों ने प्रयोग किया है उनमें कई लोग ठीक भी रहे हैं। उनका कहना है कि चनों को प्लास्टिक के लिफाफे में नहीं रखा गया था क्योंकि प्लास्टिक वैसे ही बंद है। फिर भी जो चने थे उन्हें जांच को खुद ही दिया गया ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। वही यह बात भी अब सामने आने लगी है कि जो पेयजल योजना है उसका पानी जिस खड्ड से लिफ्ट किया जाता है।
उसको लेकर लोग पहले भी सवाल उठाते रहे हैं। जल शक्ति विभाग की ओर से हालांकि फूड प्वाइजनिंग का मामला सामने आने के बाद पानी के सैंपल जो जांच किए उनकी रिपोर्ट सही पाई गई है। हालांकि अब स्वास्थ्य विभाग ने भी इस पेयजल योजना के सैंपल भरकर जांच को भेज दिए।
मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम में डॉ अभिषेक की अगुवाई में स्वास्थ्य शिक्षक सुनील कुमार, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक विजय ठाकुर के अलावा सुनील डोगरा, सुमित, शीला, आशा व अनीता ने गांव का दौरा कर ओआरएस और दवाइयां बांटी।
कटिहारा गांव में इतने लोग बीमार कैसे हुए इसको लेकर टौणीदेवी ब्लॉक की ओर से रिपोर्ट मिल गई है। उसमें फूड प्वाइजनिंग का ही उल्लेख किया गया है। जो पेयजल योजना है उसके सैंपल भी लिफ्ट कर लिए गए हैं जिन्हें जांच को भेज दिया।
वहां जो लोग बीमारी की गिरफ्त में आए थे उनका प्रॉपर फॉलोअप किया जा रहा है टीमें गांव का दौरा कर रही है। डॉक्टर संजय जगोता, एमओएच स्वास्थ्य विभाग
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