(जाेगेंद्र शर्मा) काॅलेजाें में राेलऑन पर एडमिशन लेने वाले छात्राें की ऑनलाइन पढ़ाई काे फिलहाल बंद कर दिया गया है। ऐसे में अब छात्राें के भविष्य पर संकट आ गया है। द्वितीय और तीसरे वर्ष के छात्राें के लिए अभी तक न ताे परीक्षाओं काे करवाने का काेई फैसला हुआ है और न ही उन्हें प्रमाेट करने पर शिक्षा विभाग और एचपीयू प्रशासन ने काेई निर्णय लिया है।
ऐसे में प्रदेश भर में करीब एक लाख छात्राें का भविष्य दांव पर लग गया हैं। पहले काॅलेज प्रबंधन ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू भी की थी, लेकिन अब इसे यह कहकर बंद कर दिया गया है कि, अगर छात्र पिछली क्लास में फेल हाे जाता है ताे उसकी अगली क्लास की पढ़ाई करवाने का काेई फायदा नहीं हैं।
जबकि विवि प्रशासन की ओर से पहले ही राेलऑन एडमिशन करवा दी गई है। एचपीयू के परीक्षा नियंत्रक डाॅ. जेएस नेगी का कहना है कि जिस तरह से सरकार के अादेश रहेंगे, उसी का पालन किया जाएगा। परीक्षाएं करवाई जाती है या नहीं, इस पर अभी काेई फैसला नहीं हुआ है।
यहां समझें पूरा मामला
हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी की ओर से काॅलेजाें में इस बार ऑनलाइन एडमिशन करवाई। प्लस टू से पास हाेकर आने वाले छात्राें काे मैरिट के आधार पर प्रथम वर्ष में प्रवेश दिया गया। इसी तरह जाे प्रथम वर्ष में स्टूडेंट थे, उन्हें राेलऑन आधार पर दूसरे वर्ष में जबकि, दूसरे वर्ष के छात्राें काे तीसरे वर्ष में प्रवेश दिया गया।
अभी तक सिर्फ आखिरी सेमेस्टर के छात्राें की ही परीक्षा करवाई गई है। जबकि न प्रथम वर्ष की परीक्षा हुर्ई है और न ही द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं करवाई गई है। अब हालत ये है कि बिना परीक्षा करवाए ही छात्राें काे अगली कक्षा की पढ़ाई करवाई जा रही थी, जिसे अब बंद कर दिया गया है।
छठे सेमेस्टर का रिजल्ट भी नहीं आया
प्रशासन ने दावा किया गया था कि इस बार जल्द ही छठे सेमेस्टर का रिजल्ट घाेषित कर दिया जाएगा। अभी तक रिजल्ट घाेषित नहीं किया गया है। करीब 38 हजार छात्राें ने छठे सेमेस्टर की परीक्षा दी है। छात्र-छात्राएं पिछले काफी समय से रिजल्ट के निकलने का इंतजार कर रहे हैं। जबकि, प्रशासन अभी भी रिजल्ट नहीं निकाल पा रहा है।
छात्राें काे देने हैं आठ पेपर
यूजी के छात्राें काे वार्षिक सिस्टम के तहत इस बार भी आठ परीक्षाओं काे देना पड़ेगा। प्रत्येक परीक्षा 70 अंकाें की हाेगी। एक परीक्षा देने के लिए तीन घंटें का समय लगता है। ऐसे में इस बार भी छात्राें पर दबाव है कि अगर परीक्षाएं हाेती है कि इसके लिए गैप सिस्टम खत्म किया जा सकता है।
क्याेंकि, कम समय हाेने के चलते विवि प्रशासन की ओर से गैप सिस्टम रखने से परिणाम काे निकालने में देरी हाेगी। इसलिए छात्राें काे अभी से इन परीक्षाएं की तैयारी करनी पड़ेगी।रूसा में सेमेस्टर थे, सरकार ने वार्षिक सिस्टम में बदला राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) से परेशान छात्रों की सुविधा को देखते हुए राज्य सरकार ने रूसा को वार्षिक रूप में लागू किया था।
इससे पहले हर छह महीने बाद सेमेस्टर सिस्टम के तहत परीक्षाएं हाेती थी। जबकि अब छात्रों को साल में सिर्फ एक बार ही परीक्षा देनी हाेती है। इस बार काेराेना संकट के चलते अभी तक परीक्षाओं काे करवाने पर किसी तरह का फैसला नहीं हाे पा रहा है।
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