श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधन के विरोध में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आहवान पर देशभर में मजदूर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बुधवार को जिला कुल्लू में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की संयुक्त समन्वय समिति ने सीटू कार्यालय कुल्लू से रैली निकाली और जिलाधीश कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। समिति के संयोजक राजेश ठाकुर ने कहा कि श्रम कानूनों में किए गए बदलाव पूरी तरह से मजदूर विरोधी हैं। इन बदलावों से भारत व हिमाचल प्रदेश के करोड़ों मजदूरों पर विपरीत असर पड़ेगा। इससे देश के लगभग 73 प्रतिशत मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाऐंगे। ठेका मजदूर कानून बदलाव से करोड़ों मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा बिल्कुल नष्ट हो जाएगी तथा औद्यौगिक मजदूरों की स्थिति बंधुआ मजदूरों की तरह हो जाएगी।
काम के घंटे 8 से 12 होने से मजदूरों का शोषण और बढ़ेगा और एक तिहाई मजदूर रोजगार से वांछित हो जाएंगे। वह बोले, ये कानून उद्योगपतियों,पूंजीपतियों व ठेकेदारों के हित में हैं। बैंक,बीमा,रेलवे,बीएसएनएल,रक्षा क्षेत्र,कोयला,एयरपोर्ट सहित सभी सार्वजनिक क्षेत्रों को एक एक करके बेचा जा रहा है जो कि बेहद चिंताजनक है। सरकार ने पचास साल की आयु पूर्ण करने अथवा 30 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण करने पर नियमित सरकारी कर्मचारियों की छंटनी व जबरन रिटायरमेंट का फरमान जारी कर दिया है। नव उदारवादी नीतियों के चलते पहले ही नियमित सरकारी कर्मचारियों की जगह ठेके,अनुबंध, पार्ट टाईम,टेम्परेरी भर्तियां की जा रही हैं व नियमित रोजगार पर अघोषित प्रतिबंध है।
सरकार से ये की मांग
सरकार से मांग की गई है कि श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधनों, 44 श्रम कानूनों के बदले 4 लेबर कोडों की प्रकिया, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण और 50 वर्ष की आयु अथवा 30 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण करने वाले नियमित सरकारी कर्मचारियों की छंटनी व जबरन रिटायरमैन्ट के आदेशों पर रोक लगाई जाए।
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