पालमपुर निवासी कैप्टन सौरभ कालिया मात्र 23 साल की उम्र में कारगिल युद्ध में शहीद हो गए थे। वे सर्जन बनना चाहते थे लेकिन उनके पिता डॉ. एनके कालिया ने उन्हें सेना में भेज दिया। अपने बेटे का सपना पूरा करने के लिए पिता ने पालमपुर के डाढ में बेटे काे समर्पित मल्टी स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल कैप्टन सौरभ कालिया मेमोरियल केडी, अस्पताल शुक्रवार को जनता को समर्पित कर दिया। इस अस्पताल को विशेष रूप से श्री चामुंडा मंदिर के चारों ओर लगभग 12 किलोमीटर के क्षेत्र में मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया करवाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।
फिलहाल क्षेत्र में कोई भी ऐसा सरकारी व निजी अस्पताल नहीं है जिसमें लोगाें को आसानी से इलाज मुहैया हो सके। अस्पताल में सरकारी योजनाएं आयुष्मान व हिम केयर के तहत भी इलाज किया जाएगा ताकि गरीबों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। 22 बैड के इस अस्पताल में शुरुआत में सामान्य ओपीडी, लेप्रोस्कोपिक सर्जरी तथा यूरोलॉजी ओपीडी, अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध होगी।
कैप्टन को पाकिस्तान ने 22 दिन तक किया था टॉर्चर
23 साल के सौरभ कालिया भारतीय सेना की 4 जाट रेजीमेंट में कैप्टन थे। कैप्टन 5 मई 1999 की रात अपने पांच साथियों के साथ लद्दाख की बजरंग पोस्ट पर पेट्रोलिंग कर रहे थे। तभी उन्हें पाकिस्तानी घुसपैठियों की सूचना मिली। कैप्टन उन्हें रोकने निकल पड़े। घात लगाकर बैठे घुसपैठियों ने कैप्टन व उनके पांच साथियों को पकड़ लिया गया। फिर बंधक बनाकर 22 दिनों तक टॉर्चर किया। तीन हफ्ते बाद उनके शव क्षत-विक्षत हालत में सेना को मिले। उनकी पहचान करना तक मुश्किल था।
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