राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव सहित 37 किसान नेताओं पर एफआईआर उपद्रव में अहम भूमिका निभाने वाले एक हजार से अधिक ट्विटर हैंडल की पहचान पुलिस बोली, किसानों ने शांतिपूर्ण तरीके से ट्रैक्टर परेड निकालने का वादा तोड़ा हिंसा में घायल पुलिस कर्मियों की संख्या 394 हुई, कड़ी कार्रवाई की मांग
गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव सहित 37 किसान नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, हिंसा फैलाने और महामारी अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है। इन किसान नेताओं में दर्शन पाल, राजिंदर सिंह, बलबीर सिंह राजेवाल, बूटा सिंह बुर्जगिल और जोगिंदर सिंह का नाम भी शामिल है। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को शहर में किसान ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के संबंध में 50 लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि 19 को गिरफ्तार किया गया है।
ट्रैक्टर परेड में घायल पुलिस कर्मियों की संख्या भी बढ़कर 394 हो गई है। अब तक इस मामले में 22 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। माना जा रहा है कि अभी और एफआईआर दर्ज की जाएंगी। साइबर सैल ने एक हजार से अधिक ट्विटर हैंडल की पहचान की है, जिन्होंने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मंगलवार की घटना में अहम भूमिका निभाई। इनमें कई बड़े नाम भी शामिल हैं।
बता दें कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले दो महीनों से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शनकर रहे किसानों ने 26 जनवरी को दिल्ली की सड़कों पर शांतिपूर्ण तरीके से ट्रैक्टर परेड निकालने का वादा किया था, मगर यह वादा खोखला साबित हुआ। ट्रैक्टर परेड के नाम पर जगह-जगह बवाल करते हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के बैरिकेड्स को तोड़ दिया। वाहनों में तोड़-फोड़ की और किसान मंगलवार दोपहर में लाल किले में घुस गए थे। सैकड़ों किसान प्राचीर तक पहुंच गए और यहां ठीक उस जगह धार्मिक ध्वज लगा दिए थे, जहां हर साल 15 अगस्त पर प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं।
पुलिस ने उन्हें तीन घंटे के अंदर वहां से खदेड़ दिया था, लेकिन एहतियातन लाल किले पर बुधवार को भी भारी सुरक्षाबल तैनात रहा। वहां रैपिड एक्शन फोर्स लगाई गई है। साथ ही ड्रोन से नजर रखी जा रही है। एक तरफ पुलिस अपना काम कर रही है, तो दूसरी ओर सरकार भी स्थिति पर नजर रखे हुए है।
केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल ने लाल किले पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने अफसरों से रिपोर्ट भी मांगी है। गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी दिल्ली में ऐसा उत्पात मचेगा, इसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। मगर हकीकत तो यही है कि 26 जनवरी को दिल्ली में प्रदर्शनकारी किसानों ने ऐसा बवाल काटा, जिसकी गूंज काफी समय तक सुनाई देगी।
किसान प्रदर्शन से हिल गई सरकार, रची गई गंदी साजिश
आपात बैठक में बोले किसान संगठन, दीप सिद्धू जैसे असामाजिक तत्वों ने रचा षड्यंत्र
26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान हुए उत्पात पर किसान संगठनों ने बलबीर सिंह राजेवाल की अध्यक्षता में एक आपात बैठक की। इन संगठनों ने दिल्ली में हुई हिंसक घटनाओं पर चर्चा की और निष्कर्ष निकाला कि केंद्र सरकार इस किसान आंदोलन से बुरी तरह हिल गई है, इसलिएए किसान मजदूर संघर्ष समिति और अन्य किसान संगठनों के शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट के खिलाफ एक गंदी साजिश रची गई।
संयुक्त किसान मोर्चा की आपात बैठक के बाद जारी स्टेटमेंट के मुताबिक, जिन्होंने इस किसान आंदोलन की शुरुआत के 15 दिनों के बाद अपना अलग विरोध स्थल स्थापित किया था, वे संयुक्त रूप से प्रदर्शन करने वाले संगठनों का हिस्सा नहीं थे। जब किसान संगठनों ने 26 जनवरी को किसान परेड का कार्यक्रम घोषित किया, तो दीप सिद्धू जैसे दूसरे असामाजिक तत्वों ने दूसरे किसान संगठन के साथ मिलकर किसानों के आंदोलन को विफल करने का प्रयास किया।
किसान संगठनों ने स्टेटमेंट के जरिए किसानों से अपील की कि वे धरना स्थलों पर रहें और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखें। किसान संगठनों ने इस आंदोलन को जारी रखने का संकल्प लिया है और सरकार, प्रशासन, असामाजिक तत्वों की कठोर निंदा की, जिन्होंने शांतिपूर्ण किसान प्रोटेस्ट को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में 32 संगठनों ने भाग लिया, जिसमें बलबीर सिंह राजेवाल और जगजीत सिंह डालेवाल और दर्शन पाल के साथ तमाम किसान नेता मौजूद रहे। बता दें कि ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा को लेकर कई किसान नेताओं ने मंगलवार को भी बयान जारी करते हुए हिंसा की निंदा की थी। वहीं, इस पूरी घटना केलिए भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत ने दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार ठहराया।
किसानों ने 15 लोग पकड़े, सबके पास थे सरकारी आई कार्ड
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने किसानों के ट्रैक्टर परेड में हिंसा को लेकर सवाल उठाए हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि किसानों ने 15 लोग पकड़कर दिल्ली पुलिस को सौंपे। उनका नाम उजागर होना चाहिए। उन लोगों के पास सरकारी मुलाजिम होने का आईडी कार्ड मिला है। अब आप समझ लीजिए, सरकार किसकी है। उन्होंने कहा कि यह सुनियोजित और प्रायोजित आतंक था, एक शांतिपूर्ण आंदोलन को गलत रास्ता दिखाने के लिए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि तीन स्थानों सिंघू बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर से ट्रैक्टर परेड निकली थी। दो स्थानों सिंघू बॉर्डर और टीकरी बॉर्डर पर कोई दिक्कत नहीं हुई। गाजीपुर बॉर्डर पर इसलिए दिक्कत हुई, क्योंकि जो दिल्ली पुलिस ने रूट दिया था, उसे ही पुलिस ने बदल दिया और उस रूट पर बैरियर लगा दिए।
दो बड़े संगठन किसान आंदोलन से हुए अलग
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस के अवसर पर आंदोलनकारी किसानों ने जिस तरह से दिल्ली में उपद्रव किया, उसकी हर तरफ निंदा हो रही है। इसी बीच दो बड़े किसान संगठनों ने आंदोलन से खुद को अलग कर लिया है। किसान नेता वीएम सिंह और चिल्ला बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन (भानु) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने धरना समाप्त करने की घोषणा की। किसान नेता वीएम सिंह ने कहा कि दिल्ली में जो हंगामा और हिंसा हुई, उसकी जिम्मेदारी भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत को लेनी चाहिए।
हम ऐसे किसी शख्स के साथ विरोध को आगे नहीं बढ़ा सकते, जिसकी दिशा कुछ और हो। गणतंत्र दिवस में जो कुछ भी हुआ, उस घटना से बहुत आहत हैं। हिंसा के गुनहगारों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने कहा कि मैं घटना से इतना दुखी हूं कि इस समय मैं चिल्ला बॉर्डर से घोषणा करता हूं कि पिछले 58 दिनों से भारतीय किसान यूनियन (भानु) का जो धरना चल रहा था, उसे खत्म करता हूं।

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